योग की दुनिया में कुछ आसन ऐसे होते हैं, जो सिर्फ शरीर को ही नहीं बल्कि मन को भी चुनौती देते हैं। वृश्चिकासन उन्हीं में से एक है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन, आत्मविश्वास और स्थिरता आती है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को एक उन्नत स्तर का योग आसन बताया है। उनके अनुसार, यह आसन मुख्य रूप से हाथों, कोहनियों, कंधों, कोर (पेट) और पीठ की मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाता है।
अगर इस आसन को सही तरीके से किया जाए तो मस्तिष्क में रक्त संचार सुधरता है, जिससे स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आसन हृदय के लिए भी लाभकारी है क्योंकि इनवर्टेड पोजिशन में रक्त प्रवाह संतुलित होता है।
इस आसन में संतुलन बनाए रखने के लिए पूरा ध्यान शरीर पर केंद्रित करना पड़ता है। इससे मन इधर-उधर नहीं भटकता और धीरे-धीरे मानसिक सतर्कता भी बढ़ने लगती है। यह एक अत्यंत कठिन आसन है। अभ्यासकर्ता तभी इस आसन को करें, जब वह पिंचा मयूरासन में निपुण हों।
शुरुआत में इस आसन को हमेशा किसी कुशल और प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में या दीवार के सहारे ही करें। वहीं, गर्भवती महिलाओं और मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को यह आसन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अगर किसी भी व्यक्ति के कलाई, कंधे, गर्दन या पीठ में कोई गंभीर चोट या स्लिप्ड डिस्क की तीव्र समस्या हो, तो इसका अभ्यास न करें।



