इस पर्व में सहभागी होने के लिए राज्य सरकार द्वारा चार महानगरों से विशेष ट्रेनें चलाई गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को राजकोट से विशेष ट्रेन सोमनाथ रेलवे स्टेशन पर पहुंची। ‘हर हर भोले’ और ‘जय सोमनाथ’ के गगनभेदी जयघोष से पूरा स्टेशन परिसर गूंज उठा।
सोमनाथ का इतिहास विनाश के सामने सृजन की विजय की कथा है। वर्ष 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण से लेकर सदियों तक विदेशी आक्रमणकारियों ने इस आस्था के केंद्र को खंडित करने का प्रयास किया, लेकिन हर बार भारतवर्ष के वीरों ने अपने रक्त से इस धरती की रक्षा की।
इस मौके पर भाजपा नेता माधव दवे ने कहा, “सोमनाथ में एक भव्य और शानदार सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है। बारह ज्योतिर्लिंगों में पहले सोमनाथ महादेव को सभी पूजते हैं। सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 साल हो गए हैं और मंदिर पर हुए हमले को 1,000 साल बीत गए हैं।
राजकोट के श्रद्धालु दीपक दवे ने कहा, ”हम केवल ट्रेन में बैठकर दर्शन करने नहीं आए हैं, हम अपने गौरवशाली इतिहास को नमन करने आए हैं। सोमनाथ पर हुए अनेक आक्रमणों के बावजूद आज यह भव्य शिखर खड़ा है, जो हमारी संस्कृति की जीवंतता को दर्शाता है।
देवांग जानी ने कहा, ”राजकोट से सीधी ट्रेन मिलने से हमारी यात्रा सरल हो गई। सरदार पटेल ने जिस प्रकार इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह इसे विश्वस्तरीय बना रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि हमारा स्वाभिमान आज सही अर्थों में सम्मानित हो रहा है।”
राजकोट के जगदीशभाई परमार ने कहा, ”यहां स्वाभिमान पर्व में जुड़कर अनुभव हुआ कि सोमनाथ के लिए कितने लोगों ने बलिदान दिया है। ट्रेन की सुविधा देकर सरकार ने हमें इस महान विरासत से जुड़ने का जो अवसर दिया है, उसके लिए हम प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के आभारी हैं।”
उल्लेखनीय है कि आगामी तीन दिनों तक सोमनाथ में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सोमनाथ की पौराणिक गाथा प्रस्तुत की जाएगी। 11 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा से भी श्रद्धालु विशेष ट्रेनों के माध्यम से सोमनाथ के सान्निध्य में पहुंचेंगे।
सोमनाथ: विनाश पर आस्था की अमर गाथा, आक्रमण से लेकर मोदी की विजन यात्रा!



