ल्यूमियर ब्रदर्स ने इस प्रदर्शन में अपनी क्रांतिकारी मशीन सिनेमैटोग्राफ का उपयोग किया, जो कैमरा, फिल्म प्रोसेसर और प्रोजेक्ट, तीनों का काम एक साथ कर सकती थी। उस शाम लगभग 33 दर्शकों ने टिकट लेकर छोटे-छोटे चलचित्र देखे। इनमें सबसे प्रसिद्ध लियोन स्थित ल्यूमियर फैक्ट्री से निकलते मजदूरों को दिखाती फिल्म थी।
सिनेमा इतिहास पर लिखी प्रसिद्ध पुस्तक “ द ऑक्सफोर्ड हिस्ट्री ऑफ वर्ल्ड सिनेमा ” में 28 दिसंबर 1895 की इस तारीख का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। पुस्तक के अनुसार, यही वह क्षण था जब चलचित्र प्रयोगशाला से निकलकर सार्वजनिक मनोरंजन का माध्यम बना।
हालांकि ल्यूमियर ब्रदर्स से पहले भी चलती तस्वीरों पर प्रयोग हो चुके थे, लेकिन 28 दिसंबर 1895 का प्रदर्शन इसलिए ऐतिहासिक माना जाता है क्योंकि यह नियमित टिकट लेकर आम जनता के सामने आयोजित किया गया था। यही कारण है कि फिल्म इतिहास में इस तारीख को मील का पत्थर माना जाता है।
आज, जब सिनेमा डिजिटल तकनीक, वीएफएक्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुका है, तब भी 28 दिसंबर 1895 की वह शाम हमें याद दिलाती है कि आधुनिक सिनेमा की यात्रा एक छोटे से कैफे के तहखाने से शुरू हुई थी, जहां कुछ मिनटों की चलती तस्वीरों ने पूरी दुनिया की कल्पना को हमेशा के लिए बदल दिया।
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