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Thursday, January 29, 2026
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एलसीए तेजस की ऐतिहासिक व पहली उड़ान को हुए 25 वर्ष पूरे 

रक्षा विशेषज्ञों ने तेजस कार्यक्रम को भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक मिसाल बताया है।

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भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमानों के इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल रविवार को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) की पहली उड़ान को 25 वर्ष पूरे हो गए। 25 वर्ष पूरे होने पर भारतीय वायुसेना ने इस उपलब्धि को गर्व के साथ याद किया है।

रक्षा विशेषज्ञों ने तेजस कार्यक्रम को भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली एक मिसाल बताया है। वहीं वायुसेना ने इस स्वदेशी लड़ाकू विमान के विकास में शामिल सभी संस्थानों और व्यक्तियों को विशेष रूप से सराहा है।

भारतीय वायुसेना ने इस अवसर पर एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के नवाचारी वैज्ञानिकों को बधाई दी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कुशल इंजीनियर्स के योगदान को सराहा। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना व भारतीय नौसेना के साहसी टेस्ट पायलट और इंजीनियर्स को भी बधाई दी।

इस खास मौके पर स्वदेशी लड़ाकू विमान निर्माण के इस सपने को साकार करने में वर्षों तक समर्पण दिखाने वाले सभी वायुसेना कर्मियों के योगदान को भी याद किया गया।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। आज इसकी उपलब्धियां देश के वैज्ञानिक और सामरिक आत्मविश्वास को और मजबूत करती हैं। भारतीय वायुसेना ने अपने संदेश में कहा है, ‘स्काई इज दी लिमिट’।

वहीं विशेषज्ञों का भी मानना है कि तेजस की उड़ान और भारत की तकनीकी प्रगति अब अनंत संभावनाओं की ओर अग्रसर है। गौरतलब है कि हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने तेजस लड़ाकू विमानों का निर्माण किया है। समय के साथ ही भारतीय फाइटर जेट एलसीए एमके-1ए के निर्माण में तेजी आ रही है। इस श्रेणी के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एलसीए एमके-1ए के लिए भारत के एचएएल को अमेरिकी कंपनी से जीई-404 जेट इंजन मिल रहे हैं।

एचएएल को इस वित्त वर्ष के अंत तक कुल 12 जीई-404 जेट इंजन मिलने की संभावना हैं। ये सभी इंजन भारतीय लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए में लगाए जाएंगे। यह अमेरिकी कंपनी भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को जेट इंजन सप्लाई कर रही है।

एचएएल और अमेरिकन कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के बीच 7 नवंबर को एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। यह समझौता भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमानों के इंजन को लेकर था। अमेरिकी कंपनी इस समझौते के तहत भारत को 113 जेट इंजन सप्लाई करेगी। जेट इंजन की ये सप्लाई वर्ष 2032 तक पूरी होने की संभावना है।

इस समझौते में कुल 113 एफ 404‑जीई‑आईएन 20 इंजन एवं 97 एलसीए एमके 1ए कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु स्पोर्ट पैकेज शामिल है। यह समझौता भारत के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, एलसीए एमके 1ए कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए है।

गौरतलब है कि इससे पहले 2021 में दोनों कंपनियों के बीच 99 इंजन का एक समझौता हुआ था, लेकिन नया समझौता (113 इंजन) उसका फॉलो-ऑन ऑर्डर है। दरअसल बीते दिनों भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए एक नया अनुबंध किया गया था।

इस करार के मुताबिक 62 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से भारतीय वायु सेना को 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। इन लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके-1ए की खरीद हेतु 62,370 करोड़ रुपये का यह अनुबंध किया है।

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