3.5 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर आई थी भयानक बाढ़, ईएसए ने दिखाई रोमांचक झलक!

यह बाढ़ इतनी शक्तिशाली थी कि इससे शलबताना वैलिस नामक 1,300 किलोमीटर लंबा चैनल बना, जिसकी लंबाई इटली के लगभग बराबर है। 

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पृथ्वी के साथ ही अन्य ग्रहों की दुनिया भी रहस्य और रोमांच भरी हुई है। यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने मंगल ग्रह के बेहद पुराने रहस्य को और करीब से दिखाया है। एजेंसी ने अपने सोशल मीडिया पर तस्वीरों को पोस्ट करते हुए बताया कि करीब 3.5 अरब साल पहले मंगल ग्रह की जमीन के नीचे छिपा पानी अचानक सतह पर फूट पड़ा और भयंकर बाढ़ आई थी।

जमीन के नीचे छिपा पानी अचानक सतह पर फूट पड़ा था, जिससे 10 किलोमीटर चौड़ी और 500 मीटर गहरी विशाल घाटी बन गई। यह बाढ़ इतनी शक्तिशाली थी कि इससे शलबताना वैलिस नामक 1,300 किलोमीटर लंबा चैनल बना, जिसकी लंबाई इटली के लगभग बराबर है।

ईएसए के मार्स एक्सप्रेस स्पेसक्राफ्ट द्वारा ली गई नई तस्वीरें इस प्राचीन घटना की रोमांचक झलक दिखाती हैं। सामने आई तस्वीरों में मंगल ग्रह की उस सतह को दिखाती है, जिसे पानी, लावा और समय ने मिलकर आकार दिया।

तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि समय के साथ कई गड्ढे बने जिसे इम्पैक्ट क्रेटर्स कहते हैं। हवाओं द्वारा लाई गई ज्वालामुखी राख के धब्बों के साथ ही लावा के ठंडा होने से बनी सिकुड़ी हुई लकीरें या अस्त-व्यस्त इलाका भी है, जहां चट्टानें टूट-फूटकर बिखरी पड़ी हैं।
यह क्षेत्र मंगल के दक्षिणी ऊंचे और उत्तरी निचले इलाकों के बीच स्थित है। पास ही क्राइसे प्लैनिटिया है, जो मंगल का सबसे निचला क्षेत्र माना जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां कभी प्राचीन महासागर भी रहा होगा। मार्स एक्सप्रेस 2003 से लगातार मंगल ग्रह की परिक्रमा कर रहा है और इसके बारे में जानकारी जुटा रहा है। इस मिशन में नासा और इतालवी स्पेस एजेंसी भी शामिल हैं।

इसका सबसे महत्वपूर्ण उपकरण एमएआरएसआईएस रडार है, जो मंगल की सतह के नीचे पानी, बर्फ और अन्य भूवैज्ञानिक संरचनाओं का पता लगाता है। यह खोज मंगल ग्रह पर पानी के अतीत को समझने में बहुत महत्वपूर्ण है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल कभी गर्म और नम रहा होगा, जहां नदियां, झीलें और शायद महासागर भी मौजूद थे। बाद में जलवायु बदलने के साथ यह पानी सूख गया या जमीन के नीचे चला गया।

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