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Friday, May 22, 2026
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ईंधन कीमत बढ़ने पर भी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है!

मौजूदा ईंधन आपूर्ति स्थिति पर बोलते हुए शर्मा ने भरोसा दिलाया कि भारत में फिलहाल ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और देश के किसी भी हिस्से में कमी की कोई सूचना नहीं है।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) हालिया ईंधन मूल्य वृद्धि के बावजूद अब भी भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं, और कंपनियों को अभी भी प्रतिदिन करीब 750 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और एलएनजी आयात में लगातार बाधाएं बनी हुई हैं, जिससे पिछले तकरीबन डेढ़ महीने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो रही है।

मौजूदा ईंधन आपूर्ति स्थिति पर बोलते हुए शर्मा ने भरोसा दिलाया कि भारत में फिलहाल ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और देश के किसी भी हिस्से में कमी की कोई सूचना नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमारे पास पर्याप्त भंडार है और कहीं भी ईंधन खत्म होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।”

शर्मा ने कहा, “सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि पूरे देश में पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति और सुचारु वितरण सुनिश्चित किया जा सके।”

शर्मा के अनुसार, ईंधन मांग के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अब थोक ईंधन बिक्री से अधिक मांग खुदरा पेट्रोल पंपों की ओर शिफ्ट हो रही है, ताकि उपभोक्ताओं को लगातार आपूर्ति मिलती रहे।

उन्होंने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को होने वाला दैनिक नुकसान पहले करीब 1,000 करोड़ रुपए था, जो हालिया ईंधन मूल्य वृद्धि के बाद घटकर लगभग 750 करोड़ रुपए प्रतिदिन रह गया है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन कंपनियों के लिए किसी राहत पैकेज पर विचार नहीं कर रही है।

एलपीजी आपूर्ति को लेकर शर्मा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद तेल कंपनियां स्थिर वितरण बनाए रखने में सफल रही हैं।

उन्होंने बताया, “पिछले चार दिनों में करीब 1.72 लाख एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई, जबकि लगभग 1.69 लाख बुकिंग रिक्वेस्ट मिले। इससे साफ है कि आपूर्ति शृंखला सामान्य और स्थिर बनी हुई है।”

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे भारत के ऊर्जा आयात बिल पर दबाव बढ़ा है और सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं।​ 

 
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