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Friday, May 22, 2026
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नेतृत्व परिवर्तन का सवाल किसने उठाया? फैसला हाईकमान करेगा: कर्नाटक गृह मंत्री! 

उन्होंने कहा, “मैं चुप नहीं हूं। क्या आप चाहते हैं कि मैं हर जगह इस मुद्दे पर बयान दूं? पार्टी में एक हाईकमान है और वही उचित समय पर तय करेगा कि चीजें किस तरह आगे बढ़ेंगी।”

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कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने राज्य में कांग्रेस सरकार के भीतर कथित नेतृत्व संघर्ष की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भी फैसला केवल पार्टी हाईकमान ही करेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा किसने खड़ा किया है।

बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पद को लेकर अपने पुराने दावे पर पूछे गए सवाल के जवाब में परमेश्वर ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं हैं, लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी में विश्वास नहीं रखते।

उन्होंने कहा, “मैं चुप नहीं हूं। क्या आप चाहते हैं कि मैं हर जगह इस मुद्दे पर बयान दूं? पार्टी में एक हाईकमान है और वही उचित समय पर तय करेगा कि चीजें किस तरह आगे बढ़ेंगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मीडिया में बयान देकर मैं पार्टी में कोई पद हासिल नहीं कर सकता। हाईकमान ही फैसला करेगा। मुख्यमंत्री को बदलना है या जारी रखना है, इस पर यहां चर्चा करने से कुछ नहीं बदलेगा। अंतिम निर्णय हाईकमान ही लेगा।”

परमेश्वर ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री बनाए जाने के समय उनके कार्यकाल की कोई समयसीमा तय नहीं की गई थी।

उन्होंने कहा, “जहां तक मुझे पता है, सिद्धारमैया के लिए कोई तय कार्यकाल नहीं रखा गया था। हाईकमान या पार्टी महासचिवों ने हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।”

जब कांग्रेस हाईकमान से नेतृत्व विवाद पर स्पष्टता की मांग को लेकर सवाल पूछा गया तो परमेश्वर ने कहा कि जब कोई सवाल ही नहीं है तो सफाई की जरूरत क्यों पड़े।

उन्होंने कहा, “अगर कोई सवाल होगा तो वे स्पष्ट करेंगे। जब ऐसा कोई सवाल ही नहीं है तो स्पष्टीकरण क्यों दिया जाए? नेतृत्व परिवर्तन का सवाल किसने उठाया है? उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की कोई मांग नहीं की है।”

कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना द्वारा यह कहे जाने पर कि नेतृत्व परिवर्तन होने पर परमेश्वर मुख्यमंत्री बनें, गृह मंत्री ने कहा कि यह बयान सद्भावना में दिया गया था।

उन्होंने कहा, “हम एक ही जिले से हैं और साथ पढ़े हैं। स्वाभाविक है कि आपसी सद्भावना होगी। उन्हें लगा होगा कि मौका मिले तो तुमकुरु जिले को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसमें गलत क्या है?”

परमेश्वर ने तुमकुरु शहर को निवेश आकर्षित करने के लिए बेंगलुरु से जोड़ने संबंधी अपने बयान का भी बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह तुमकुरु जिले की पहचान बदलने की बात नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मेरे सुझाव को सही नजरिए से समझा जाना चाहिए। मैं जिले का नाम नहीं बदल रहा हूं। क्षेत्र की पहचान बदलने वाला मैं कौन होता हूं? तुमकुरु शहर की बेंगलुरु से नजदीकी को देखते हुए अगर बेंगलुरु का नाम उससे जोड़ा जाए तो निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने भाजपा पर अनावश्यक आलोचना करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी विकास की अवधारणा को समझ नहीं रही है।

परमेश्वर ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे नोएडा दिल्ली क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है, लेकिन उसकी अपनी अलग पहचान कायम है। इसी तरह दुनिया के कई देशों में पड़ोसी शहरों को विकास के लिए आपस में जोड़ा जाता है।

उन्होंने कहा कि तुमकुरु बेंगलुरु के बेहद करीब है और वहां 20,000 एकड़ में औद्योगिक हब विकसित किया जा रहा है, जिसके दो चरण पूरे हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि इसे एशिया का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हमने जापानी टाउनशिप के लिए जमीन आवंटित की है और कई बड़ी कंपनियां वहां आई हैं। फूड पार्क भी स्थापित किए गए हैं। तुमकुरु में लाखों छात्र हैं, नौ इंजीनियरिंग कॉलेज और तीन मेडिकल कॉलेज हैं। उन्हें अवसरों की जरूरत है।”
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