ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत से ले जाए गए नागा समुदाय के 39 पूर्वजों के मानव अवशेष आखिरकार अपने वतन लौटेंगे। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी का पिट रिवर्स म्यूज़ियम इन अवशेषों को नागा समुदाय को वापस करने के लिए राज़ी हो गया है। इस फ़ैसले को एक ऐतिहासिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी काउंसिल ने 13 जुलाई, 2026 को 39 नागा पूर्वजों के अवशेषों को वापस करने की औपचारिक मंज़ूरी दी थी। नागा समुदाय ने कुल 40 मानव अवशेषों को वापस करने की मांग की थी। हालांकि, नागा समुदाय से इसके संबंध के साफ़ सबूत न होने के कारण एक अवशेष को वापस करने की मंज़ूरी नहीं दी गई। पिट रिवर्स म्यूज़ियम के अनुसार, ये अवशेष मुख्य रूप से 1910 और 1940 के बीच ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासकों और मानवविज्ञानी जॉन हेनरी हटन और जेम्स फिलिप मिल्स द्वारा ऑक्सफ़ोर्ड ले जाए गए थे। म्यूज़ियम ने बताया कि कई अवशेष अपनी मर्ज़ी से नहीं दिए गए थे, बल्कि मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान ज़ब्त कर लिए गए थे।
नागा समुदाय के प्रतिनिधि कई सालों से इस प्रोसेस पर काम कर रहे हैं। फोरम फॉर नागा रिकंसिलिएशन (FNR) और इसके रिकवर, रिस्टोर एंड डीकोलोनाइज (RRaD) इनिशिएटिव ने 2020 में शुरू हुए रिपैट्रिएशन प्रोसेस में अहम भूमिका निभाई। जून 2025 में, नागा आदिवासी नेताओं, सीनियर सिटिजन और रिसर्चर्स के एक डेलीगेशन ने पिट रिवर्स म्यूजियम का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने अपने पूर्वजों की निशानियों को देखा और अपने वतन वापसी के लिए आगे का प्रोसेस शुरू किया। इस दौरे के बाद ‘रिपैट्रिएशन पर नागा-ऑक्सफोर्ड डिक्लेरेशन’ जारी किया गया।
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