पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण बनी अस्थिरता के बीच, ईरान का तेल लेकर भारत की ओर आ रहा एक जहाज अपना मार्ग बदल चुका है। इस घटनाक्रम से हैरानी जताई जा रही है और चर्चाएं तेज हो गई हैं। ईरान के कच्चे तेल से भरा यह टैंकर मूल रूप से भारत आने वाला था, लेकिन अब बीच रास्ते से ही अपना मार्ग बदलकर चीन की ओर बढ़ रहा है।
जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी कच्चा तेल ले जा रहे एक टैंकर ने यात्रा के दौरान अपना घोषित गंतव्य भारत से बदलकर चीन कर दिया है, जिससे करीब सात वर्षों में भारत की संभावित पहली आयात पर संदेह पैदा हो गया है। ‘पिंग शुन’ नामक यह अफ्रामैक्स जहाज अब लगभग 6 लाख बैरल ईरानी तेल लेकर चीन के डोंगयिंग की ओर जा रहा है। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, इस सप्ताह की शुरुआत में इस टैंकर ने गुजरात के वडीनार को अपना निर्धारित गंतव्य बताया था। हाल ही में वॉशिंगटन द्वारा कुछ प्रतिबंधों में ढील देने के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियां समुद्र के जरिए ईरानी तेल हासिल करने के विकल्प तलाश रही थीं, इसी बीच यह घटनाक्रम सामने आया।
अगर यह खेप भारत पहुंचती, तो 2019 के बाद यह देश की ईरान से पहली कच्चे तेल की आयात होती। उस साल अमेरिका द्वारा सख्त प्रतिबंध लगाए जाने के बाद खरीद रोक दी गई थी। केप्लर के प्रमुख शोध विश्लेषक (रिफाइनिंग और मॉडलिंग) सुमित रितोलिया के अनुसार, यह जहाज पिछले तीन दिनों से वडीनार की ओर बढ़ रहा था, लेकिन पहुंचने से ठीक पहले इसने भारत को अपने गंतव्य से हटाकर चीन की ओर संकेत कर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि यह बदलाव भुगतान से जुड़ी चिंताओं के कारण हो सकता है।
रितोलिया के मुताबिक, विक्रेता अब शर्तें सख्त कर रहे हैं और पहले की 30-60 दिन की क्रेडिट अवधि से हटकर अग्रिम या त्वरित भुगतान की मांग कर रहे हैं। इस सौदे में शामिल खरीदार और विक्रेता की पहचान स्पष्ट नहीं है। हालांकि, जहाज की स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) पर दिखाया गया गंतव्य अंतिम नहीं होता और इसे यात्रा के किसी भी चरण में बदला जा सकता है।
जैसा कि पहले बताया गया था, वडीनार बंदरगाह पर रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी द्वारा संचालित 20 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाली रिफाइनरी स्थित है। रितोलिया ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल की ढुलाई के दौरान इस तरह के बदलाव असामान्य नहीं हैं, लेकिन यह इन सौदों की वित्तीय शर्तों और जोखिमों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भुगतान संबंधी मुद्दे सुलझ जाते हैं, तो यह खेप भारतीय रिफाइनरी की ओर मोड़ी जा सकती है। साथ ही, यह घटना दर्शाती है कि चीन के अलावा अन्य देशों तक ईरानी तेल पहुंचाने में व्यावसायिक परिस्थितियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी लॉजिस्टिक व्यवस्था।
भारत के तेल मंत्रालय ने कहा है कि ईरान से आयात फिर से शुरू करने का कोई भी फैसला तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर लिया जाएगा। 2018 में प्रतिबंध सख्त होने से पहले भारत ईरान के तेल का एक प्रमुख खरीदार था और अनुकूल कीमतों व रिफाइनरी की जरूरतों के अनुसार हल्के और भारी दोनों प्रकार के तेल का आयात करता था। एक समय भारत की कुल आयात में ईरानी तेल की हिस्सेदारी 11.5 प्रतिशत तक थी। 2018 में भारत ने प्रतिदिन 5,18,000 बैरल तेल आयात किया था, जो जनवरी से मई 2019 के बीच अमेरिकी सीमित छूट के दौरान घटकर 2,68,000 बैरल प्रतिदिन रह गया। मई 2019 के बाद से यह आयात बंद है और भारत ने इसकी भरपाई के लिए मध्य पूर्व, अमेरिका और अन्य देशों से तेल खरीदना शुरू किया।
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