कंसल्टेंसी दिग्गज एक्सेंचर ने बीते तीन महीनों में 11,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है और कंपनी ने साफ चेतावनी दी है कि यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़े पैमाने पर दांव लगाने वाली यह कंपनी अब तेजी से मानव संसाधनों को घटा रही है।
एक्सेंचर ने डबलिन से ऐलान किया कि वह करीब 865 मिलियन डॉलर (लगभग ₹7,669 करोड़) के पुनर्गठन कार्यक्रम में जुटी है। कंपनी की सीईओ जूली स्वीट ने कहा, “हम बहुत तेज टाइमलाइन पर आगे बढ़ रहे हैं। जहां रिस्किलिंग संभव नहीं है, वहां हमें मुश्किल फैसले लेकर लोगों को बाहर करना पड़ रहा है।”
मई से अगस्त 2025 के बीच कंपनी की वैश्विक वर्कफोर्स 7,91,000 से घटकर 7,79,000 हो गई। केवल पिछले तिमाही में ही कंपनी को $615 मिलियन का सेवरेंस खर्च करना पड़ा और मौजूदा तिमाही के लिए $250 मिलियन और तय किया गया है। कंपनी का लक्ष्य इस बदलाव से सालाना $1 बिलियन से ज्यादा की बचत करने का है।
एक्सेंचर ने कहा कि छंटनी की प्रक्रिया नवंबर 2025 तक जारी रह सकती है। हालांकि कितनी नौकरियां सीधे इस रीस्ट्रक्चरिंग से जुड़ी हैं, यह स्पष्ट नहीं किया गया। लेकिन सेवरेंस बिल से साफ है कि असर दुनियाभर के दफ्तरों पर पड़ेगा।
कंपनी ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में उसके Generative AI प्रोजेक्ट्स से $5.1 बिलियन की नई बुकिंग हुई, जो पिछले साल के $3 बिलियन से कहीं ज्यादा है। एक्सेंचर अब 77,000 AI और डेटा प्रोफेशनल्स का दावा करता है, जो दो साल पहले 40,000 थे। कंपनी इन्हें “Reinventors” कहती है और मानती है कि भविष्य इन्हीं पर टिका है।
एक्सेंचर की रणनीति बताती है कि कंसल्टिंग और IT सेवाओं का पुराना मॉडल, जिसमें हजारों कंसल्टेंट्स क्लाइंट ऑफिस में काम करते थे, अब दबाव में है। कॉर्पोरेट क्लाइंट्स खर्च घटा रहे हैं और AI से मिलने वाली दक्षता को कंपनियां तेजी से अपना रही हैं।
कर्मचारियों के लिए संदेश साफ है, या तो नई स्किल्स सीखें, या नौकरी जाने का जोखिम उठाएं। वहीं क्लाइंट्स के लिए कंपनी खुद को डिजिटल भविष्य का भरोसेमंद साथी बताने की कोशिश कर रही है। लेकिन यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि इस बदलाव में मानवीय विशेषज्ञता कितनी सुरक्षित रह पाएगी। एक्सेंचर की यह छंटनी संकेत देती है कि AI सिर्फ बैक-ऑफिस नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंसल्टिंग जैसे हाई-एंड सेक्टर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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