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एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान शांति वार्ता विफल; आगे क्या ?

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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के प्रयास एक बार फिर विफल हो गए हैं। इस्तांबुल में हुई ताजा वार्ता बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई, जबकि तुर्की और कतर ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी। दोनों देशों के बीच एक नाज़ुक युद्धविराम तकनीकी रूप से अभी भी लागू है, लेकिन जमीनी गतिविधियों और आरोपों ने स्थिति को लगातार तनावपूर्ण बनाए रखा है।

2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में लौटने के बाद से, पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों में वृद्धि हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP को अफगान सीमा के भीतर सुरक्षित ठिकाने मिल रहे हैं। वहीं, अफगान सरकार इस दावे को खारिज करती है और कहती है कि उसकी जमीन किसी पड़ोसी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं की जा रही।

इस्तांबुल वार्ता से पहले, दोनों पक्षों के बीच सीमा क्षेत्र में गंभीर झड़पें हुई थीं, जिनमें सैनिकों और नागरिकों की मौतें हुईं। 19 अक्टूबर को कतर की मध्यस्थता के बाद संघर्ष विराम घोषित किया गया था, परंतु सीमा पर छिटपुट झड़पें जारी रहीं।

वार्ता के दौरान मुख्य विवाद पाकिस्तान की यह मांग थी कि अफगानिस्तान TTP के खिलाफ “ठोस कार्रवाई” करे और इस बात पर लिखित समझौता दे। इस पर तालिबान प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि “पाकिस्तान की मांगें अव्यावहारिक थीं, इसलिए बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।” उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान स्थिरता चाहता है, लेकिन “यदि युद्ध थोप दिया जाता है, तो हम अपना बचाव करेंगे।”

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पुष्टि की कि बैठक विफल रही। उन्होंने कहा, “बातचीत खत्म हो चुकी है। कोई अगली बैठक तय नहीं है।” आसिफ ने लिखा समझौते की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केवल मौखिक वादों से काम नहीं चल सकता।

वहीं, जमीनी स्तर पर इसके गंभीर प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। पाकिस्तान अक्टूबर से अपनी मुख्य सीमा चौकियों को बंद रखे हुए है, जिससे व्यापार लगभग ठप हो गया है। हजारों ट्रक सीमा पर फंसे हैं और आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो रही हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान में अवैध अफगान प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की कार्रवाई भी तेज़ है, जिससे मानवीय संकट और दबाव बढ़ रहा है।

तुर्की और कतर ने उम्मीद जताई थी कि यह वार्ता तनाव कम करने का मार्ग बनाएगी, लेकिन अब दोनों पक्षों ने अगले दौर की बातचीत की कोई तारीख नहीं दी है। स्थिति इस समय अनिश्चित विराम पर टिकी है, जिसमें संघर्ष की संभावना समाप्त नहीं हुई, बल्कि सिर्फ टली हुई है।

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