अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने पूरे देश में दूरसंचार सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप नेटब्लॉक्स ने पुष्टि की है कि देश अब “पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट” की स्थिति में है। इससे मोबाइल इंटरनेट, सैटेलाइट टीवी और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के काबुल कार्यालयों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। जानकारी के अनुसार, सोमवार (29 सितंबर) देर शाम 5 बजे के आसपास काबुल और कई अन्य प्रांतों में फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट सेवाएं बंद हो गईं। मंगलवार(30 सितंबर) सुबह बैंकिंग और कारोबारी सेवाओं के प्रभावित होने से आम लोगों पर इसका गहरा असर पड़ा। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटराडार 24 के अनुसार, काबुल हवाई अड्डे पर कम से कम आठ उड़ानें रद्द कर दी गईं।
तालिबान अधिकारियों ने इसे “अनैतिकता” रोकने का कदम बताते हुए अनिश्चितकालीन प्रतिबंध की घोषणा की है। स्थानीय टीवी चैनल टोलो न्यूज ने दर्शकों से कहा है कि वे अपडेट के लिए सोशल मीडिया का सहारा लें, क्योंकि उसके प्रसारण पर भी असर पड़ सकता है।
तालिबान के 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से देश में कड़े इस्लामी शरीया कानून लागू किए जा रहे हैं। हाल ही में महिलाओं द्वारा लिखी किताबों को विश्वविद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों से हटाने, मानवाधिकार और यौन उत्पीड़न पर आधारित शिक्षण सामग्री पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए हैं। महिलाओं और लड़कियों को 12 साल की उम्र के बाद पढ़ाई से वंचित किया जा चुका है और 2024 के अंत में दाई प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी चुपचाप बंद कर दिए गए।
पूर्व सांसद मरियम सोलैमंखिल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अफगानिस्तान से ऑनलाइन खामोशी बहरा कर देने वाली है।” वहीं पूर्व संपादक हामिद हैदरी ने तंज कसते हुए कहा कि तालिबान ने देश को उत्तर कोरिया से भी आगे इंटरनेट कटऑफ की दौड़ में पहला स्थान दिला दिया है।
नेटब्लॉक्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, “अफगानिस्तान अब पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति में है। सुबह के समय कई नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से डिस्कनेक्ट किए गए और अब टेलीफोन सेवाएं भी प्रभावित हो चुकी हैं।”
पिछले कई हफ्तों से लोग इंटरनेट की धीमी या न के बराबर स्पीड को लेकर शिकायत कर रहे थे। तालिबान ने वैकल्पिक इंटरनेट मार्ग बनाने की बात कही थी, लेकिन उसका कोई विवरण नहीं दिया गया। फिलहाल, यह प्रतिबंध देश को और गहरी अलगाव की स्थिति में धकेल रहा है।
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