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ट्रंप के दबाव के बीच ग्रीनलैंड में कनाडा और फ्रांस ने खोले वाणिज्य दूतावास

डेनमार्क के प्रति समर्थन का संकेत

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड पर अधिक नियंत्रण की इच्छा जताए जाने के बीच कनाडा और फ्रांस ने डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड की राजधानी नूक (Nuuk) में अपने-अपने वाणिज्य दूतावास खोलने का निर्णय लिया है। शुक्रवार (6 फरवरी) को औपचारिक रूप से शुरू हुए इन दूतावासों को डेनमार्क और नाटो सहयोगी देशों के प्रति राजनीतिक समर्थन के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वशासी क्षेत्र है और अब हाल के वर्षों में आर्कटिक सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों और भविष्य के समुद्री मार्गों के कारण वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में आ गया है। हालांकि कनाडा और फ्रांस दोनों का कहना है कि यह कदम पहले से योजनाबद्ध था, लेकिन इसका समय ऐसे दौर में आया है जब वॉशिंगटन की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी ने सहयोगी देशों में चिंता बढ़ाई है।

कनाडा के नए वाणिज्य दूतावास के उद्घाटन समारोह में विदेश मंत्री अनिता आनंद और देश की पहली स्वदेशी गवर्नर जनरल मैरी साइमन मौजूद रहीं। इस अवसर पर आनंद ने कहा कि आर्कटिक पड़ोसी होने के नाते कनाडा और डेनमार्क का साम्राज्य स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। कनाडा के लिए यह कदम प्रतीकात्मक भी माना जा रहा है, क्योंकि स्वदेशी इनुक नेता मैरी साइमन की उपस्थिति के जरिए ग्रीनलैंड की आदिवासी आबादी के मुद्दे,जैसे जलवायु परिवर्तन और अधिकारों को केंद्र में लाने का प्रयास किया गया।

वहीं फ्रांस ने नूक में यूरोपीय संघ का पहला कांसुलेट जनरल स्थापित किया है। फ्रांसीसी मिशन का नेतृत्व ज्यां-नोएल पोइरिए कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। इस पहल को यूरोपीय संघ के लिए आर्कटिक क्षेत्र में एक प्रत्यक्ष सुनने का केंद्र माना जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा में यूरोपीय हित सुरक्षित रह सकें।

यह कूटनीतिक गतिविधि अमेरिका और डेनमार्क के बीच हालिया तनावपूर्ण दौर के बाद सामने आई है। जनवरी में राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध के चलते डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों पर कड़े टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। बाद में नाटो महासचिव मार्क रुटे की मध्यस्थता से हुए एक “ढांचा समझौते” के बाद ये धमकियां वापस ले ली गईं, हालांकि सहयोगी देशों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक नए आर्कटिक सुरक्षा समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को देखते हुए कनाडा और फ्रांस ने क्षेत्र में अपनी स्थायी मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि ग्रीनलैंड के पास वैकल्पिक साझेदार मौजूद रहें।

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