वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में पॉलीफेनॉल नाम के पौधों से मिलने वाले प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं। ये ऐसे तत्व हैं जो शरीर में बनने वाले हानिकारक फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और लंबे समय में कई बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
ग्रीन टी में पॉलीफेनॉल की एक खास कैटेगिरी ‘कैटेचिन’ ज्यादा मात्रा में मौजूद रहती है, जो शरीर में सूजन को कम करने और ग्लूकोज के इस्तेमाल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के मामले में ग्रीन टी को अक्सर अधिक प्रभावी माना जाता है। कई शोधों में पाया गया है कि इसमें मौजूद कैटेचिन और अन्य एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की इंसुलिन को बेहतर बनाते हैं। इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त में मौजूद शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम करता है।
जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तब ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। ग्रीन टी में मौजूद तत्व इस प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे रक्त में शुगर का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
वहीं, ब्लैक टी कम फायदेमंद है। ब्लैक टी भी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। इसमें थियाफ्लेविन और थियारूबिजिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो चाय की पत्तियों के ऑक्सीकरण के दौरान बनते हैं। मेडिकल रिसर्च बताती है कि ये तत्व दिल की सेहत को बेहतर बनाने, सूजन कम करने और शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं।
कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि ब्लैक टी का नियमित सेवन ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक हो सकता है, लेकिन इसके प्रभाव ग्रीन टी की तुलना में थोड़े कम दिखाई देते हैं।
चाय के सेवन का तरीका भी उसके फायदों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीन टी को बहुत ज्यादा उबालना नहीं चाहिए। हल्के गर्म पानी में कुछ मिनट तक छोड़ने से इसके सक्रिय तत्व सुरक्षित रहते हैं।
ग्रीन टी के अन्य फायदों की बात करें तो यह वजन कंट्रोल, बेहतर मेटाबॉलिज्म और दिल के स्वास्थ्य में लाभदायक है।
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