केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 8–9 जनवरी 2026 को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर ब्रुसेल्स जाने वाले हैं। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इस दौरे से नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच बढ़ते कूटनीतिक और तकनीकी संवाद को और गति मिलने की उम्मीद है।
भारत-ईयू आर्थिक संबंधों के लिहाज से यह वार्ता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है। दोनों पक्षों ने जून 2022 में करीब नौ साल के लंबे अंतराल के बाद FTA वार्ताओं को दोबारा शुरू किया था। वार्ताओं के पुनः आरंभ होने के बाद से अब तक 14 दौर की औपचारिक बातचीत हो चुकी है, साथ ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर कई उच्चस्तरीय संवाद भी हुए हैं। दिसंबर 2025 में दोनों पक्षों के बीच ताजा मंत्रीस्तरीय बातचीत हुई थी।
यूरोपीय संघ वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और एक प्रमुख निवेशक भी है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-ईयू के बीच वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रस्तावित FTA को केवल एक व्यापार समझौते के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रुसेल्स दौरे के दौरान श्री पीयूष गोयल यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त श्री मारोश शेफचोविच के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य वार्ता में शामिल टीमों को रणनीतिक दिशा देना, लंबित मुद्दों का समाधान निकालना और संतुलित व महत्वाकांक्षी समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देना है।
मंत्रिस्तरीय वार्ता से पहले 6–7 जनवरी 2026 को ब्रुसेल्स में भारत के वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक सुश्री सबीन वेयांड के बीच गहन चर्चा हुई थी। यह बैठक आगामी उच्चस्तरीय संवाद के लिए आधार तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत की वार्ता रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ यह है कि FTA से आम नागरिक को प्रत्यक्ष लाभ मिले। भारत श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे वस्त्र, चमड़ा, परिधान, रत्न एवं आभूषण और हस्तशिल्प के लिए शून्य शुल्क पहुंच की मांग कर रहा है। इसके साथ ही किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के हितों की सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ने ही एक व्यापक और आधुनिक समझौते को लेकर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति जताई है। आगामी वार्ताओं से नियम-आधारित व्यापार प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि होने और भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
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