भुजंगासन को अंग्रेजी में ‘कोबरा पोज’ भी कहते हैं। दरअसल, इस आसन को करने के दौरान धड़ का पोज फन फैलाए हुए सांप की तरह होता है, और यही इसकी खास पहचान है। भुजंगासन कोई साधारण योगासन नहीं है; यह पैरों की उंगलियों से लेकर सिर तक शरीर के हर हिस्से पर असर डालता है।
यह आसन न सिर्फ शरीर को बल्कि मन को भी शांत और ऊर्जावान बनाता है। भुजंगासन कोई साधारण योगासन नहीं है, यह पैरों की उंगलियों से लेकर सिर तक शरीर के हर हिस्से पर असर डालता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन (कोबरा पोज) पेट के बल लेटकर किया जाने वाला एक प्रमुख योगासन है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता, पाचन में सुधार करता, पीठ दर्द से राहत देता और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर श्वास संबंधी समस्याओं में फायदेमंद है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से किडनी पर जोर पड़ता है, जिससे किडनी में मौजूद विषाक्त पदार्थ निकलने लगते हैं और इसकी कार्यक्षमता में सुधार होता है।
भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब अपने दोनों हाथों को धीरे-धीरे छाती के पास लाएं और हथेलियों को जमीन पर टिका दें। इसके बाद गहरी सांस लेते हुए अपनी नाभि के हिस्से को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर ले जाते हुए ऊपर छत या आसमान की तरफ देखें।



