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3 मार्च को दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें कितने प्रकार के होते हैं चंद्र ग्रहण!

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है, जबकि सूर्य ग्रहण अमावस्या पर। चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा धुंधला या लाल दिखाई देता है।

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चंद्र ग्रहण एक खूबसूरत खगोलीय घटना है, जो साल में चार से सात बार होती है। इस दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा के मुकाबले थोड़ी झुकी हुई हैं, इसलिए हर पूर्णिमा पर ग्रहण नहीं होता, बल्कि कभी-कभी ही होता है।

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है, जबकि सूर्य ग्रहण अमावस्या पर। चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा धुंधला या लाल दिखाई देता है। यह ग्रहण पृथ्वी के आधे हिस्से से दिखता है। ये घटनाएं प्रकृति की अनोखी प्रस्तुति हैं। साफ आसमान में बिना किसी उपकरण के देखा जा सकता है।

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण या ब्लड मून होगा। वहीं, दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को है। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण के तीन मुख्य प्रकार होते हैं। इनमें पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण शामिल हैं।

पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में चला जाता है। पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। नीली और बैंगनी रोशनी ज्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी सीधे पहुंचती है। इसलिए चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का दिखता है, जिसे ब्लड मून कहते हैं। वायुमंडल में जितनी ज्यादा धूल या बादल, उतना गहरा लाल रंग दिखता है। यह ग्रहण कई घंटों तक रह सकता है।

ब्लड मून पूर्ण चंद्र ग्रहण का ही एक नाम है। सूर्य की रोशनी सफेद दिखती है, लेकिन इसमें कई रंग होते हैं। सूर्यास्त या सूर्योदय के समय लाल रोशनी ज्यादा पहुंचती है, क्योंकि नीली रोशनी बिखर जाती है। चंद्र ग्रहण में भी यही होता है। पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती रोशनी चंद्रमा पर पड़ती है, जैसे दुनिया के सभी सूर्योदय और सूर्यास्त एक साथ चंद्रमा पर प्रोजेक्ट हो रहे हों। यही वजह है कि चंद्रमा लाल दिखता है।

आंशिक चंद्र ग्रहण: चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया के सिर्फ एक हिस्से से गुजरता है तो छाया बढ़ती है लेकिन चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढक पाती, फिर पीछे हट जाती है।

पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण: वहीं जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी हल्की छाया (पेनम्ब्रा) में चला जाता है, तब पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा बहुत हल्का या धुंधला दिखता है और कई बार नजर नहीं आता।

 
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