ईरान युद्ध के बीच अरब सागर में ब्रिटेन ने तैनात की परमाणु पनडुब्बी

सैन्य कार्रवाई के संकेत

ईरान युद्ध के बीच अरब सागर में ब्रिटेन ने तैनात की परमाणु पनडुब्बी

Britain deploys nuclear submarine in Arabian Sea amid Iran war

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने अरब सागर में अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी एचएमएस एंसन तैनात कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस यह पनडुब्बी उत्तरी अरब सागर में रणनीतिक स्थिति ले रही है, जिससे Iran के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह तैनाती ऐसे समय में की गई है जब क्षेत्र में संघर्ष का दायरा बढ़ता जा रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता गहराती जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।

ब्रिटेन सरकार ने हाल ही में अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति भी दी है, जिससे ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले किए जा सकें। इसके तहत RAF फेयरफोर्ड और डिएगो गार्सिया जैसे बेस शामिल हैं।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर ने शुरुआत में इस तरह की सैन्य कार्रवाई को लेकर सतर्क रुख अपनाया था और कहा था कि किसी भी कदम की वैधता सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, पश्चिम एशिया में ब्रिटेन के सहयोगी देशों पर हमलों के बाद उन्होंने अपने रुख में बदलाव किया और अमेरिका को सैन्य ठिकानों के उपयोग की मंजूरी दे दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एचएमएस एंसन ने 6 मार्च को पर्थ से प्रस्थान किया था और यह नियमित अंतराल पर लंदन स्थित सैन्य मुख्यालय से संपर्क बनाए रख रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, किसी भी हमले से पहले अंतिम आदेश प्रधानमंत्री स्तर पर ही जारी किया जाएगा।

इस बीच, ईरान द्वारा डिएगो गार्सिया को निशाना बनाने की कोशिश की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन इस प्रयास ने ईरान की लंबी दूरी की क्षमता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

इजरायली सैन्य अधिकारी इयाल ज़मीर ने कहा कि इन मिसाइलों की रेंज यूरोप तक पहुंच सकती है, जिससे बर्लिन, पैरिस और रोम जैसे शहर भी संभावित खतरे की जद में आ सकते हैं। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को 48 घंटे के भीतर पूरी तरह सुरक्षित नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह तैनाती केवल सैन्य तैयारी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है, जो क्षेत्र में शक्ति संतुलन और सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

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