पाकिस्तान में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने हाई-ऑक्टेन ईंधन पर लेवी में भारी बढ़ोतरी का फैसला किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ईंधन पर टैक्स को 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक उच्च स्तरीय बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी।
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से लग्जरी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-ऑक्टेन ईंधन पर लागू होगा और इसका असर आम जनता पर नहीं पड़ेगा। आधिकारिक बयान में कहा गया, “इस निर्णय से हर महीने करीब 9 अरब रुपये की बचत होगी, जिसे जनता को राहत देने के लिए उपयोग किया जाएगा।”
पाकिस्तान सरकार का दावा है कि आम वाहनों में उपयोग होने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस फैसले के तहत कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं की गई है। “देश के अमीर वर्ग पर बोझ डाला गया है, ताकि अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके,” बयान में कहा गया।
हालांकि, इससे पहले 6 मार्च को पाकिस्तान सरकार ने वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी के चलते पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। इसके बाद पेट्रोल की कीमत 266.17 रुपये से बढ़कर 321.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल 280.86 रुपये से बढ़कर 335.86 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
हवाई किराए में तेज बढ़ोतरी
ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल महंगा होने के कारण घरेलू उड़ानों के किराए में 2,800 से 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। कराची से लाहौर और इस्लामाबाद जैसे प्रमुख रूट्स पर यह असर साफ देखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में और भी ज्यादा उछाल आया है, जहां टिकट कीमतें 10,000 से 28,000 रुपये तक बढ़ गई हैं। मध्य पूर्व और मध्य एशिया जाने वाली फ्लाइट्स में करीब 15,000 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फिलहाल पाकिस्तान में बढ़ते ईंधन के दाम और ऑक्टेन ईंधन पर लगाए गए टॅक्स देश में आर्थिक संतुलन बनाए रखने और राजस्व बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखें जा रहें है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है की ईंधन संकट और तेजी से बढ़ती महंगाई का दबाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए इससे भी बड़ी चुनौतियां निर्माण कर सकता है।
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