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ब्रिटेन: बच्चों में मोटापा रोकने के लिए दिन के टीवी और ऑनलाइन जंक फूड विज्ञापन प्रतिबंधित

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बच्चों में बढ़ते मोटापे पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ब्रिटेन ने एक दिलचस्प फैसला लिया है। सोमवार (5 जनवरी) से देश में दिन के समय टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। सरकार ने इसे बचपन के मोटापे से निपटने के लिए अग्रणी कार्रवाई बताया है। इसके साथ ही स्थानीय निकायों को स्कूलों के आसपास फास्ट फूड दुकानों की स्थापना रोकने का अधिकार भी दिया गया है।

नए नियम जिनमें पाम ऑयल, वसा, नमक और चीनी की अधिक मात्रा वाले प्रोसेस्ड और फास्ट फूड उत्पादों के विज्ञापनों पर केंद्रित हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से हर साल बच्चों के आहार से लगभग 7.2 अरब कैलोरी हटने की उम्मीद है।  ब्रिटेन में हर तीन में से एक बच्चा प्राथमिक स्कूल छोड़ते समय अधिक वजन या मोटापे का शिकार होता है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव मोटापे से बचाने के लिए जरुरी है।

सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध 9:00 बजे रात से पहले प्रसारित होने वाले टीवी विज्ञापनों और ऑनलाइन किसी भी समय दिखाए जाने वाले पेड विज्ञापनों पर लागू होंगे। मंत्रालय का अनुमान है कि इससे बच्चों में मोटापे के मामलों में करीब 20,000 की कमी आएगी और स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग £2 अरब (करीब $2.7 अरब) का लाभ होगा।

नियमों के तहत यह पाबंदी उन सभी कंपनियों पर लागू होगी, जिनमें 250 या उससे अधिक कर्मचारी हैं और जो ऐसे उत्पाद बनाती या बेचती हैं। सरकार का तर्क है कि इससे छोटे व्यवसायों को राहत मिलेगी, जिनकी विज्ञापन क्षमता सीमित होती है और जो मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यम पर निर्भर रहते हैं।

यह फैसला पहले से लागू अन्य उपायों की कड़ी का हिस्सा है, जिनमें प्री-पैकेज्ड मीठे पेय पदार्थों जैसे मिल्कशेक, रेडी-टू-गो कॉफी और टेट्रा पैक दूध पर विस्तारित शुगर टैक्स शामिल है। सरकार का कहना है कि विज्ञापन बच्चों में अस्वास्थ्यकर खाने की आदतों को आकर्षक बनाकर पेश करते हैं, जिससे वे संतुलित आहार के बजाय जंक फूड की ओर झुकते हैं और मोटापे का खतरा बढ़ता है।

स्वास्थ्य मंत्री एशले डाल्टन ने बयान में कहा, “रात 9 बजे से पहले जंक फूड के विज्ञापनों को सीमित करके और ऑनलाइन पेड विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाकर, हम बच्चों को अस्वास्थ्यकर भोजन के अत्यधिक संपर्क से बचा सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह कदम राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) को सिर्फ बीमारी के इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोकथाम पर भी केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा है, “ताकि लोग ज्यादा स्वस्थ जीवन जी सकें।”

ओबेसिटी हेल्थ अलायंस की कार्यकारी निदेशक कैथरीन जेनर ने इसे बच्चों के हित में लंबे समय से प्रतीक्षित कदम बताया। वहीं, डायबिटीज यूके की मुख्य कार्यकारी कोलेट मार्शल ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का एक बड़ा जोखिम कारक है और यह बीमारी युवाओं में गंभीर जटिलताओं जैसे किडनी फेल्योर और हृदय रोग का कारण बन सकती है।”

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंग्लैंड में प्राथमिक स्कूल में प्रवेश करने वाले करीब 22 प्रतिशत बच्चे पहले से ही अधिक वजन या मोटापे का शिकार होते हैं, और यह आंकड़ा माध्यमिक स्कूल तक पहुंचते-पहुंचते एक तिहाई से अधिक हो जाता है। सरकार का कहना है कि नए नियम बच्चों की सेहत सुधारने की दिशा में एक निर्णायक हस्तक्षेप साबित होंगे।

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