भारत की ऊर्जा सुरक्षा के बीच एक अहम घटनाक्रम में रूसी कच्चा तेल लेकर जा रहा टैंकर एक्वा टाइटन शनिवार (21 मार्च) शाम न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर पहुंचा। यह टैंकर मूल रूप से चीन के रिज़्हाओ बंदरगाह के लिए रवाना हुआ था, लेकिन रास्ता बदलकर भारत पहुंचने वाला सात जहाजों के समूह में पहला है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैंकर जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर क्षेत्र से रवाना हुआ था। मार्च के मध्य में इसने अपना रास्ता बदल लिया। अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे “प्रतिबंधित” रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, ऐसे कम से कम सात टैंकर, जो पहले चीन जा रहे थे, अब भारत की ओर रुख कर चुके हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40–50 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके अलावा देश के LNG और LPG आयात का बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग पर निर्भर करता है। ऐसे में वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार और रिफाइनरियों के लिए प्राथमिकता बन गया है।
इसी क्रम में एक और टैंकर जौजौ एन के 25 मार्च को सिक्का बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। इसने भी मार्च की शुरुआत में अपना रास्ता बदल लिया था। जहाजों की इस रीरूटिंग पर नजर रखने वाली एजेंसियों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने हाल ही में रूसी तेल की खरीद बढ़ाई है, जिससे अल्पकालिक कच्चे तेल की कमी को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसी बीच, रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर भी एक सकारात्मक संकेत मिला है। पाइक्सिस पायनियर नामक कार्गो जहाज टेक्सास से एलपीजी लेकर रविवार को न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचा। फिलहाल बंदरगाह पर सुरक्षा जांच और अनलोडिंग की प्रक्रिया जारी है।
रूसी तेल और एलपीजी की यह नई आपूर्ति भारत में ईंधन संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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