चीन ने रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में काम करने वाले अधिकारियों को हनी ट्रैप से सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। एक सरकारी कर्मचारी को विदेश यात्रा के दौरान ब्लैकमेल किए जाने और बाद में जासूसी के आरोप में जेल भेजे जाने के बाद चीन ने यह कदम उठाया है।
चीन की नेशनल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन (राष्ट्रीय राज्य गोपनीयता संरक्षण प्रशासन) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लेख प्रकाशित कर बताया कि सैन्य और संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े कर्मी विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा रचे जा रहे हनी ट्रैप का लगातार शिकार हो रहे हैं।
प्रशासन द्वारा जारी लेख में एक व्यक्ति का ज़िक्र किया गया है, जिसकी पहचान केवल उसके उपनाम ‘गुओ’ के रूप में की गई है। गुओ एक मुख्यभूमि स्थित सैन्य उद्यम से जुड़ा था और एक परियोजना स्वीकार करने के लिए उसे एक अज्ञात विदेशी शहर की यात्रा पर भेजा गया था। इसी दौरान उसकी मुलाक़ात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने खुद को बिज़नेस प्रतिनिधि बताया। लेख के अनुसार, “यह दिखने में आकस्मिक मुलाक़ात वास्तव में एक विदेशी खुफिया एजेंसी द्वारा रचा गया हनी ट्रैप था।” रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संपर्क जानबूझकर आयोजित सामाजिक कार्यक्रमों के ज़रिये कराया गया था।
इसके बाद गुओ का उस विदेशी एजेंसी से जुड़ी एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बने। बाद में उसे इस रिश्ते को सार्वजनिक करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया गया और इसी दबाव में उसे जासूसी नेटवर्क में शामिल कर लिया गया।
लेख में आगे बताया गया कि गुओ ने न केवल खुद संवेदनशील सूचनाएं साझा कीं, बल्कि संगठन के लिए भर्ती कार्य भी किया। उसने एक तकनीकी विशेषज्ञ चेन और एक अन्य कर्मचारी ली को भी इस नेटवर्क में शामिल किया। रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों ने मिलकर अपने सैन्य-औद्योगिक उद्यम से जुड़े आंतरिक खुफिया इनपुट और गोपनीय सैन्य सूचनाएं विदेशी एजेंसी तक पहुंचाईं। प्रशासन के लेख में कहा गया, “खुफिया सूचनाओं के इस आदान-प्रदान के दौरान, गुओ मौके पर दुभाषिये की भूमिका निभा रहा था।”
इस घटना के बाद लेख में आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन को और मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है। इसमें विदेश यात्रा पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए “फुल-साइकल” प्रबंधन ढांचे की सिफारिश की गई है। इस ढांचे में यात्रा से पहले सुरक्षा समीक्षा, विदेश में रहते हुए सक्रिय निगरानी और वापसी के बाद अवलोकन जैसे प्रावधान शामिल करने की बात कही गई है।
इसके अलावा, लेख में निवारक शिक्षा को सख़्त करने और अनिवार्य प्रकटीकरण नीतियों को लागू करने का सुझाव दिया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों को अपने सभी विदेशी संपर्कों की घोषणा करनी होगी, ताकि दीर्घकालिक संस्थागत निगरानी सुनिश्चित की जा सके। लेख में कहा गया, “हमें विदेश जाने वाले कर्मियों की जागरूकता और राजनीतिक विवेक को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, इसके लिए विशिष्ट मामलों और इंटरैक्टिव अनुभवात्मक शिक्षा का सहारा लिया जाना चाहिए।”
चीन की यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है, जब बीजिंग लगातार यह दावा करता रहा है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां उसके रक्षा, तकनीक और औद्योगिक क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए व्यक्तिगत कमजोरियों का इस्तेमाल कर रही हैं। इस ताज़ा मामले को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए, चीनी प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे जोखिमों से निपटने के लिए नियमों और निगरानी को और कड़ा किया जाएगा।
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