चीन ने रविवार(16 नवंबर) को पूर्वी चीन सागर में स्थित विवादित सेंकाकू द्वीपसमूह के आसपास अपनी कोस्ट गार्ड टुकड़ी भेजकर जापान पर दबाव और बढ़ा दिया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब ताइवान को लेकर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के हालिया बयान ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को खुलकर सामने ला दिया है। चीन की कोस्ट गार्ड ने कहा कि उसका पोत-1307 समूह डियाओयू (चीन द्वारा प्रयुक्त नाम) द्वीपों के “आंतरिक जलक्षेत्र” में अधिकार प्रवर्तन गश्त कर रहा था। एजेंसी ने इसे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक बताया, जबकि जापान लगातार इन द्वीपों पर अपनी संप्रभुता का दावा दोहराता रहा है।
द्वीप निर्जन हैं, लेकिन सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हाल के वर्षों में यहां चीनी जहाजों की उपस्थिति बढ़ी है, जिसे टोक्यो अपनी संप्रभुता पर बढ़ते अतिक्रमण के रूप में देखता है। तनाव तब और गहरा गया जब 7 नवंबर को ताकाइची ने संसद में कहा कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया, तो टोक्यो सैन्य प्रतिक्रिया पर विचार कर सकता है। बीजिंग ने इसे “उत्तेजक” बताते हुए प्रधानमंत्री से बयान वापस लेने की मांग की है।
कूटनीतिक टकराव के बीच चीन ने जापान में अध्ययन करने की योजना बनाने वाले छात्रों को “बढ़ते जोखिम” के प्रति आगाह किया है। चीन के शिक्षा मंत्रालय और राज्य प्रसारक सीसीटीवी ने कहा कि जापान में रह रहे या जाने की तैयारी कर रहे छात्रों को स्थानीय सुरक्षा हालात पर करीबी नज़र रखनी चाहिए। इसके अलावा, चीन ने नागरिकों को यह भी सलाह दी है कि वे जापान में पढ़ाई करने का निर्णय “सावधानी से पुनर्विचार” करें। हालांकि यह कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन चीनी छात्रों की संख्या में गिरावट जापानी विश्वविद्यालयों को गहरा प्रभाव डाल सकती है, जहां पिछले वर्ष 1.23 लाख से अधिक चीनी विद्यार्थी थे।
क्षेत्रीय स्थिति भी तनावपूर्ण बनी हुई है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में उसने 30 चीनी सैन्य विमानों, सात नौसैनिक जहाजों और एक ‘सरकारी’ पोत को द्वीप के आसपास गतिविधियां करते हुए पकड़ा। मंत्रालय के अनुसार, तीन तक चीनी ड्रोन ताइवान और जापान के योना गुनी जैसे दूरस्थ द्वीपों के बीच उड़ान भरते देखे गए।
टोक्यो पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ओसाका में चीन के कौंसुल जनरल द्वारा दिए गए एक तीखे बयान में कहा गया था, “जो गंदा सिर बाहर निकले, उसे काट दिया जाएगा”, इसके बाद चीन ने दो साल में पहली बार जापान के राजदूत को तलब किया और चेतावनी दी कि ताइवान को लेकर किसी भी संभावित संघर्ष में जापानी हस्तक्षेप नाकामयाब होगा। इसी बीच चीन ने अपने नागरिकों को जापान की यात्रा से बचने की सलाह दी, जिसके बाद कई चीनी एयरलाइनों ने मुफ्त रिफंड या टिकट बदलने की सुविधा दी।
चीन के सरकारी मीडिया ने शनिवार देर रात ताकाइची पर तीखा हमला बोलते हुए उनके बयान को खतरनाक रूप से उत्तेजक और मूल रूप से विकृत बताया। उसका दावा है कि यदि चीन–जापान टकराव हुआ तो अमेरिका के शामिल होने की संभावना भी बढ़ेगी और स्थिति अकल्पनीय परिणामों वाले व्यापक संघर्ष में बदल सकती है। ताइवान ने स्थिति पर अपनी कठोर और स्पष्ट स्थिति बनाए रखते हुए दोहराया है कि उसके भविष्य का फैसला केवल वहां के लोग करेंगे।
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