पहाड़ों पर आज भी दुर्लभ जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग रोगों के लक्षणों को कम करने में होता है। ऐसी ही एक दुर्लभ और बहुत कम मिलने वाली और शक्तिशाली औषधि चित्रक है, जिसे पाचन से जुड़ी बीमारियों के लिए काल माना गया है।
चित्रक एक प्रभावी जड़ी-बूटी है, जिसकी तासीर गर्म होती है और स्वाद कसेला। सालों से चित्रक का उपयोग पेट, जोड़ों, खांसी, डायबिटीज, घाव भरने, याद्दाश्त को तेज करने और त्वचा से जुड़ी अनेक समस्याओं में किया जाता रहा है।
बच्चों में अक्सर पेट में कीड़े पड़ने की परेशानी रहती है क्योंकि वे बिना हाथ धोए या फिर गंदा खाना खा लेते हैं, जिससे पेट में दर्द और कृमि विकार बढ़ जाते हैं। ऐसे में चित्रक की जड़ का पानी पेट दर्द और कृमि रोगों से बचाव में मदद करता है। दूसरा, अगर जोड़ों में दर्द की परेशानी है या फिर सूजन की परेशानी है, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा दर्द में राहत पाने के लिए प्रभावित स्थान पर लेप भी लगाया जा सकता है।
आज की जीवनशैली में त्वचा से संबंधित रोग बहुत जल्दी प्रभावित करते हैं। रक्त में अशुद्धि की वजह से चेहरे पर कील और मुहांसे परेशान करने लगते हैं। कई लोगों को, खासकर गर्मियों में, फोड़े-फुंसी और पुराने त्वचा रोगों की समस्या होने लगती है। ऐसे में चित्रक का लेप प्रभावी तरीके से काम करता है।
इसके साथ ही अगर श्वसन से जुड़े मौसम बदलते ही परेशान करने लगते हैं या सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से पुरानी खांसी, जुकाम और दमा जैसी समस्याएं आती हैं, तब भी चित्रक का सेवन किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि किसी भी रोग में इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
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