वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार (25 मार्च)को गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और आयातक देशों को राहत मिली है। कीमतों में यह गिरावट अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति प्रस्ताव पेश किए जाने और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की अनुमति देने के संकेतों के बाद आई है।
एशियाई कारोबार के दौरान वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जिससे यह 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। वहीं, WTI क्रूड की कीमतों में 3.5 प्रतिशत की कमी आई और यह 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा।
सप्ताह की शुरुआत में तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के चलते कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं। अमेरिकी पक्ष द्वारा ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले की चेतावनी और ईरान की प्रतिक्रिया ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी थी।
हालांकि, स्थिति में नरमी तब आई जब ट्रंप ने सार्थक बातचीत का हवाला देते हुए पांच दिन के लिए हमलों पर रोक लगाने की घोषणा की। इसके बाद कीमतों में गिरावट शुरू हुई। हालांकि, ईरान द्वारा बातचीत से इनकार किए जाने पर तेल फिर से 100 डॉलर के पार पहुंच गया था। ट्रंप ने 15 बिंदुओं वाला युद्धविराम प्रस्ताव रखा, जिसके बाद बुधवार को हालात में सुधार के संकेत दिखे। इस प्रस्ताव में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं।
इसके साथ ही ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को सूचित किया है कि वह “गैर-शत्रुतापूर्ण” जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के लिए तैयार है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
उधर, अमेरिका द्वारा अपने रणनीतिक भंडार से तेल जारी किए जाने से भी बाजार में आपूर्ति बेहतर हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शांति वार्ता आगे बढ़ती है और दोनों पक्ष टकराव से बचते हैं, तो तेल की कीमतों में और गिरावट संभव है। हालांकि, युद्ध के कारण कई तेल प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है, ऐसे में कीमतों के पूर्व-युद्ध स्तर पर लौटने में समय लग सकता है।
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