रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय वायुसेना (IAF) की क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी करते हुए फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंज़ूरी दे दी है। यह फैसला 12 फरवरी 2026 को DAC की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। यह सौदा भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है और इसका उद्देश्य IAF की गंभीर रूप से घट चुकी स्क्वाड्रन क्षमता को तत्काल और दीर्घकालिक स्तरों पर मज़बूत करना है।
भारतीय वायुसेना इस समय 42 स्क्वाड्रन की अपेक्षा में काफ़ी कम स्तर पर काम कर रही है। मिग-21 और जैगुआर जैसे पुराने प्लेटफॉर्म के रिटायरमेंट ने इस कमी को और गहरा किया है। ऐसे में 114 राफेल विमानों की मंज़ूरी को परिचालन दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
मंज़ूर किए गए कुल 114 विमानों में से 90 राफेल भारत में ही निर्मित किए जाएंगे, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। शेष 24 विमान ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में सीधे फ्रांस से आएंगे, ताकि IAF को त्वरित परिचालन राहत मिल सके। यह हाइब्रिड मॉडल तत्काल युद्धक तत्परता और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता, दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन साधने के लिए किया गया है।
यह मॉडल आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है और इसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों, विशेषकर टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, की अहम भूमिका होगी।
इस मंज़ूरी का समय भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इसी महीने के अंत में भारत के राजकीय दौरे पर आने वाले हैं। यह सौदा भारत-फ्रांस के रणनीतिक संबंधो को और भी मज़बूत करने जा रहा है, जिनकी नींव 2016 में हुए 36 राफेल विमानों के सौदे से शुरू हुई। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।
भारतीय वायुसेना वर्तमान में 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है, जिन्हें 2020-21 के बीच शामिल किया गया था। इन विमानों ने अभ्यासों और सीमा पर गश्त में अपनी क्षमता साबित की है। नए सौदे के बाद IAF के पास कुल 150 राफेल होंगे, जो वायु श्रेष्ठता, डीप-स्ट्राइक, सटीक ज़मीनी हमले और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता जैसे बहु-भूमिकीय अभियानों की रीढ़ बनेंगे।
राफेल में अत्याधुनिक AESA रडार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और अस्त्र मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियार के साथ संगतता शामिल है, जो IAF के आधुनिकीकरण रोडमैप से पूरी तरह मेल खाती है।
90 विमानों का घरेलू निर्माण भारत के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। इससे कंपोज़िट एयरफ्रेम, एवियोनिक्स इंटीग्रेशन और इंजन मेंटेनेंस जैसी उच्च-स्तरीय क्षमताओं में निवेश बढ़ेगा। डसॉल्ट एविएशन के ऑफ़सेट दायित्वों से हज़ारों कुशल नौकरियों के सृजन और मज़बूत सप्लाई-चेन के विकास की संभावना है।
इसी बीच हिंद-महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियाँ तेज़ हो रही हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के J-20 लड़ाकू विमानों की तैनाती और पाकिस्तान के J-10C व JF-17 बेड़े के चलते भारतीय वायुसेना के सामने गंभीर चुनौती खड़ी है। मेटियोर मिसाइलों से लैस राफेल की BVR क्षमता और उन्नत सेंसर इसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त दिलाएगी।
अब यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंज़ूरी, Acceptance of Necessity (AoN) के औपचारिकरण और व्यावसायिक बातचीत के चरण में जाएगा। अनुमानित लागत ₹1.2 से ₹1.5 लाख करोड़ के बीच बताई जा रही है। पहले के राफेल सौदे से मिले सबक के आधार पर इस बार कड़े समय-सीमा प्रावधान और प्रदर्शन गारंटी शामिल की जाएंगी।
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