ईरान युद्ध में खतरनाक मोड़: अमेरिका ने तैनात किए घातक मिसाइल

भंडार पर भी दबाव

ईरान युद्ध में खतरनाक मोड़: अमेरिका ने तैनात किए घातक मिसाइल

Dangerous turn in Iran war: US deploys deadly missiles

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश करता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने अपने सबसे घातक लंबी दूरी के मिसाइल सिस्टम JASSM-ER को बड़े पैमाने पर तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना अपने लगभग पूरे JASSM-ER मिसाइल भंडार को ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के लिए तैयार कर रही है। ये मिसाइलें 600 मील (करीब 965 किलोमीटर) से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं और इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली से बचते हुए लक्ष्य को भेद सकें।

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक संबोधन में ईरान को अश्म युग में वापस भेजने की चेतावनी दी थी, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण हालात और भड़क गए हैं।

वैश्विक ठिकानों से मिसाइलों की शिफ्टिंग:

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के अंत में अमेरिका ने प्रशांत क्षेत्र समेत दुनिया भर में मौजूद अपने मिसाइल स्टॉकपाइल से JASSM-ER को हटाकर अमेरिका मध्य कमान (CENTCOM) के ठिकानों और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस में भेजने का आदेश दिया। इसके अलावा, करीब दो-तिहाई छोटे रेंज वाले JASSM मिसाइलों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।

अमेरिका लंबे समय से इस तरह के स्टैंडऑफ हथियारों का उपयोग करता रहा है, जिससे सैनिकों के जोखिम को कम किया जा सके। हालांकि, इससे उसके रणनीतिक भंडार पर दबाव बढ़ता जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी भी सामने हैं।

अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक ईरान में 12,300 से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया है, जिनमें नौसैनिक पोत, मिसाइल लॉन्चर और रक्षा निर्माण इकाइयां शामिल हैं। युद्ध के पहले चार हफ्तों में ही 1,000 से ज्यादा JASSM-ER मिसाइलों का उपयोग हो चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध से पहले अमेरिका के पास करीब 2,300 JASSM-ER मिसाइलें थीं, लेकिन अब वैश्विक स्तर पर केवल लगभग 425 ही उपलब्ध रह गई हैं। इसके अलावा, करीब 75 मिसाइलें तकनीकी खराबी के कारण इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उत्पादन क्षमता के हिसाब से इन मिसाइलों के भंडार को फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं।

जंग में झटके और रणनीति में बदलाव

हाल ही में ईरान ने अमेरिकी वायुसेना को बड़ा झटका देते हुए F-15E स्ट्राइक ईगल और A-10 जैसे लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया है। इसके अलावा, बचाव अभियान में लगे ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों और कई ड्रोन को भी निशाना बनाया गया।

इन घटनाओं ने अमेरिका के ‘एयर सुपीरियरिटी’ के दावों को कमजोर किया है और उसे अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब अमेरिका मानव-संचालित विमानों की बजाय लंबी दूरी की मिसाइलों के जरिए हमलों पर अधिक निर्भर हो रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, B-52 और B-1B जैसे बमवर्षक विमानों से इन मिसाइलों का उपयोग पहले ही शुरू हो चुका है, जो इस बात का संकेत है कि युद्ध अब और अधिक संसाधन-गहन और लंबा खिंच सकता है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष अब एक निर्णायक और बेहद खतरनाक चरण में पहुंच चुका है, जहां किसी भी बड़े सैन्य कदम से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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