दिल्ली में 15 विदेशी नागरिक निर्वासन के लिए भेजे गए, अवैध प्रवास के खिलाफ पुलिस की सख्ती जारी!

अभियान के तहत आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां और निर्वासन की कार्रवाइयां की जा सकती हैं।

दिल्ली में 15 विदेशी नागरिक निर्वासन के लिए भेजे गए, अवैध प्रवास के खिलाफ पुलिस की सख्ती जारी!

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भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्ती बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक बांग्लादेशी महिला समेत कुल 15 विदेशी नागरिकों को निर्वासन की प्रक्रिया के तहत उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई शुरू की है। इन सभी को द्वारका जिले में पुलिस की कार्रवाई के दौरान पकड़ा गया था। इनमें 11 नागरिक नाइजीरिया के, दो आइवरी कोस्ट के, और एक-एक नागरिक बांग्लादेश व तंजानिया के बताए गए हैं।

द्वारका जिले के डीसीपी अंकित सिंह के नेतृत्व में एंटी-नारकोटिक्स सेल और छावला थाने की टीम ने इन सभी को अप्रैल 2025 में विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास भारत में रहने के लिए कोई वैध वीजा या दस्तावेज नहीं थे। गिरफ्तारी के बाद सभी को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उनके निर्वासन के आदेश जारी किए गए और बाद में उन्हें हिरासत केंद्र भेज दिया गया।

यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राजधानी क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस उनके देश भेजना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

इससे पहले भी अप्रैल महीने में दिल्ली के साउथ कैंपस थाना क्षेत्र में आठ बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। इनकी पहचान रबीउल इस्लाम (38), उसकी पत्नी सीमा (27), पुत्र अब्राहम (5), पी. खातून (36), सादिया सुल्ताना (21), सुहासिनी (1), आर्यन (7) और रिफत आरा मोयना (28) के रूप में हुई थी। सभी को एफआरआरओ की सहायता से निर्वासन केंद्र भेजा गया था और उनके प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस राजधानी में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ गहन छानबीन और सतत कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां और निर्वासन की कार्रवाइयां की जा सकती हैं।

यह मामला न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दिल्ली में अवैध विदेशी प्रवासियों की बढ़ती समस्या को उजागर भी करता है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन ने अब और कठोर रुख अपनाने का संकेत दिया है।

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