आरबीआई के दिसंबर बुलेटिन में गवर्नर ने कहा कि महंगाई के कम होने से सरकार और केंद्रीय बैंक को देश के विकास को बढ़ावा देने का अच्छा मौका मिला है। आरबीआई आगे भी देश की जरूरतों के अनुसार सही कदम उठाता रहेगा, ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि 2025 एक चुनौतीपूर्ण साल रहा, लेकिन इसके बावजूद हम इस साल की उपलब्धियों से संतुष्ट हैं। इस साल देश की अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन किया, महंगाई नियंत्रण में रही और बैंकिंग व्यवस्था और मजबूत हुई।
उन्होंने बताया कि बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए नियमों में सुधार किया गया। इससे व्यापार करना आसान हुआ, ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ी और वित्तीय व्यवस्था बेहतर हुई।
आरबीआई गवर्नर ने कहा, “हम भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक समर्थन देने और देश की तरक्की के लिए एक नई उम्मीद, जोश और दृढ़ संकल्प के साथ नए साल में प्रवेश कर रहे हैं।”
अक्टूबर में लागू हुई नीति के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई बहुत तेजी से घटी है और यह अभूतपूर्व रूप से निचले स्तर पर पहुंच गई है।
फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टारगेटिंग (आईआईटी) को अपनाने के बाद पहली बार वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में औसत महंगाई दर 1.7 प्रतिशत रही, जो अब तक का सबसे कम स्तर है। अक्टूबर 2025 में यह और गिरकर सिर्फ 0.3 प्रतिशत रह गई।
दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसका कारण त्योहारी सीजन में ज्यादा खर्च और जीएसटी दरों में सुधार रहा।
मल्होत्रा ने आगे कहा कि पहले छह महीनों में महंगाई 2.2 प्रतिशत और विकास दर 8.0 प्रतिशत रही, जो ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ का संकेत है, यानी न ज्यादा महंगाई और न कम विकास।
आने वाले समय में अच्छी खेती, कम महंगाई, मजबूत कंपनियां और बेहतर बैंकिंग व्यवस्था जैसे घरेलू कारक देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी।
गवर्नर ने कहा कि सुधार संबंधी पहलों को जारी रखने से विकास को और अधिक गति मिलेगी।
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