पाकिस्तान में लगातार दूसरे दिन भूकंप के तेज झटकों ने आमजन को हिला कर रख दिया। रविवार (3 अगस्त) तड़के 12:10 बजे राजधानी इस्लामाबाद समेत कई हिस्सों में 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए और देर रात तक खुले आसमान के नीचे डरे-सहमे बैठे रहे। नेशनल सिस्मिक मॉनिटरिंग सेंटर (NSMC) के अनुसार, रविवार को आया यह भूकंप रावत से 15 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में केंद्रित था और इसकी गहराई केवल 10 किलोमीटर मापी गई — जो इसे बेहद सतही और खतरनाक बनाती है।
इस ताजे झटके का असर इस्लामाबाद, रावलपिंडी, खैबर पख्तूनख्वा, मर्दान, मुर्री, हरिपुर, चकवाल, ताला गंग, कलर कहार सहित कई शहरों और कस्बों में महसूस किया गया। लोग कलिमा तय्यबा पढ़ते हुए घरों से बाहर निकल आए और भारी संख्या में लोग मस्जिदों व खुले मैदानों की ओर दौड़ पड़े।
इससे पहले शनिवार (2 अगस्त )को भी 5.4 तीव्रता का एक भूकंप अफगानिस्तान के हिंदुकुश पर्वतीय क्षेत्र में आया था, जिसकी गहराई 102 किलोमीटर थी। उस झटके का असर न केवल पाकिस्तान, बल्कि अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान तक महसूस किया गया था। शनिवार के झटकों से पेशावर, स्वात, मलकंद, नौशेरा, चारसद्दा, करक, दीर, मोहम्मद, शांगला, हंगू, स्वाबी, एबटाबाद, और पंजाब प्रांत के लाहौर, सियालकोट, गुजरांवाला, गुजरात, अटॉक, टेक्सिला, मुर्री जैसे क्षेत्रों में भी धरती हिली थी।
हालांकि, अब तक दोनों भूकंपों से किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार दो दिनों में भूकंप के झटकों से लोगों में भारी डर और तनाव का माहौल बन गया है। आफ्टरशॉक्स की आशंका के चलते अधिकांश लोग घरों में लौटने से कतरा रहे हैं। भूकंप की पुनरावृत्ति ने देश की भूकंपीय तैयारी और आपदा प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल NSMC स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों को सतर्क रहने तथा किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
पाकिस्तान जिस भूकंपीय ज़ोन में स्थित है, वहां इस तरह के झटकों की आशंका हमेशा बनी रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हिंदुकुश क्षेत्र की भौगोलिक सक्रियता और भारतीय महाद्वीप की टेक्टोनिक प्लेट का एशियन टेक्टोनिक प्लेट से टकराव क्षेत्र में लगातार भूकंप की प्रमुख वजह है।
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