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विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

ट्रंप और कार्नी की बयानबाजी के बीच दोनों विदेश मंत्रियों की वार्ता

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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ फलदायक बातचीत की, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान को जारी रखने पर चर्चा की। जयशंकर ने अपनी बातचीत के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

दौरान अमेरिका और कनाडा के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। वार्ता से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर चीन के साथ व्यापार समझौते की स्थिति में भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके जवाब में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट किया कि ओटावा चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं कर रहा है और हाल की बातचीत केवल कुछ टैरिफ विवादों को सुलझाने तक सीमित है। उन्होंने कहा, “हमने चीन के साथ जो किया वह पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुई कुछ समस्याओं को ठीक करना था।”

कनाडा के दृष्टिकोण के अनुसार, देश अपनी गैर-अमेरिकी निर्यात क्षमता को अगले 10 वर्षों में दोगुना करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अनीता आनंद ने कहा, “हमें कनाडाई अर्थव्यवस्था की रक्षा और सशक्तिकरण करना है, और व्यापार में विविधीकरण इसके लिए मूलभूत है। इसलिए हमने चीन की ओर रुख किया, इसलिए हम भारत आए क्योंकि  हम अपने सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखेंगे।”

इस रणनीति के तहत कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन गोवा में आयोजित ऊर्जा सम्मेलन में भाग लेंगे और भारतीय उद्योग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों पक्ष महत्वपूर्ण खनिज, यूरेनियम और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) में सहयोग और संभावित सौदों पर चर्चा करेंगे। कनाडा के पास इन संसाधनों की प्रचुर मात्रा है।

अनीता आनंद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध अभी भी मौजूद हैं और उनका यह संबंध जारी रहेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी इस बात पर जोर दिया कि “हमारा कनाडा के साथ अत्यधिक एकीकृत मार्केट है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान कच्चा माल छह बार सीमा पार कर सकता है। हम यह नहीं कर सकते कि कनाडा ऐसा रास्ता बने जिससे चीनी सस्ते माल अमेरिका में प्रवेश करें।”

विश्लेषकों का कहना है कि भारत-कनाडा संबंधों का यह विस्तार न केवल दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक व्यापार में विविधता लाकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होगा।

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