अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब वैश्विक स्तर पर भारत को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्सांडर स्टब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संकट में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। 4 से 7 मार्च के बीच भारत दौरे पर आए स्टब ने नई दिल्ली में आयोजित रायसेन डायलॉग 2026 में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष वैश्विक स्तर पर गंभीर संकट का रूप ले सकता है और इसे रोकने के लिए तत्काल युद्धविराम जरूरी है।
स्टब ने भारत की “रणनीतिक सावधानी” और संतुलित कूटनीति की सराहना करते हुए कहा, “हमें सीज़फ़ायर की ज़रूरत है… मैं सोच रहा हूँ कि क्या भारत सच में इसमें शामिल हो सकता है। नई दिल्ली को दोनों तरफ़ से भरोसा है।” इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा शांति की अपील का भी उल्लेख किया।
Breaking: Finland President calls for India to broker US-Iran ceasefire
"We need a ceasefire. I'm wondering if India can actually get involved. We saw Foreign Minister Jaishankar call for a ceasefire to calm things down," says President Alexander Stubb pic.twitter.com/analqtIeD3
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) March 17, 2026
यह राय केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी रणनीतिक हलकों में भी इसी तरह की सोच उभर रही है। अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल डगलस मैक्ग्रेगोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी है कि वे इस संकट से बाहर निकलने के लिए भारत की मदद लें।
एक साक्षात्कार में मैकग्रेगर ने कहा, “अगर युद्ध रोकना है, तो प्रेसिडेंट ट्रंप को PM मोदी को फ़ोन करना चाहिए। भारत के इज़राइल, ईरान और चीन के साथ बैलेंस्ड रिश्ते हैं। यदि संघर्ष जारी रहा तो तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं और अमेरिका के मिसाइल भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा है।”
Col. Douglas Macgregor tells TUCKER CARLSON Donald Trump needs to call Narendra Modi to stop the war.
"My personal preference, if I were advising the President
(Trump), is to call Prime Minister Modi in India. He has good relations with Israel. He also has good relations with… pic.twitter.com/KIY3X4xmUb— Sensei Kraken Zero (@YearOfTheKraken) March 12, 2026
इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने अब तक “अनुशासित तटस्थता” की नीति अपनाई है। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ऑपरेशन संकल्प के तहत अपने ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ ऊर्जा टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकाला है, वहीं दूसरी ओर उसने अमेरिकी नेतृत्व वाले किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होने से इनकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यही संतुलित नीति, जहां वह सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है, उसे इस जटिल संघर्ष में एक भरोसेमंद मध्यस्थ बनाती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत इस भूमिका को स्वीकार करता है और वैश्विक तनाव को कम करने में निर्णायक योगदान देता है।
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