उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर: कई ज़िले जलमग्न, राहत और बचाव कार्य जारी!

कई गांव जलमग्न हो गए हैं, खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, और लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर: कई ज़िले जलमग्न, राहत और बचाव कार्य जारी!

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उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा और राप्ती जैसी प्रमुख नदियाँ कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। बाढ़ का सबसे अधिक असर पूर्वांचल और तराई के जिलों में देखने को मिल रहा है।

प्रभावित जिले: बलिया, गाजीपुर, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बाराबंकी, बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, संत कबीर नगर और कुशीनगर सहित 20 से अधिक ज़िलों में बाढ़ से हालात बिगड़ रहे हैं।

बलिया और गाजीपुर में गंगा और घाघरा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई गांव जलमग्न हो गए हैं, खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, और लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में बाधा आ रही है। स्कूलों को अस्थाई राहत शिविरों में बदला गया है, जहां लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी बाढ़ राहत दलों और स्थानीय प्रशासन की टीमें नावों, ट्रैक्टरों और राहत किट्स के साथ सक्रिय हैं।

बाढ़ के दौरान फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एयरलिफ्ट की व्यवस्था भी की जा रही है, खासकर वहां जहां सड़क मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है। पशुओं के लिए चारे और दवाओं की व्यवस्था की गई है।

प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर जैसे शहरों में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, घाटों पर पानी भर चुका है और कई मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। यमुना नदी से जुड़े इलाकों में कटान और जलभराव से भारी नुकसान की आशंका है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगामी कुछ दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। विभाग ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राज्य सरकार और राहत एजेंसियां मिलकर बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर और खराब मौसम के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और लोगों से अपील कर रहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मांगे।

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