फ्रांस ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड के साथ किसी भी तरह की सैन्य छेड़छाड़ वैश्विक व्यवस्था को पूरी तरह नई दुनिया की ओर धकेल देगी। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के हालिया बयानों और संकेतों के बीच यह चेतावनी पश्चिमी गठबंधन के भीतर ही तनाव के स्वर तेज़ होते दिख रहे हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में फ्रांस के वित्त मंत्री रोलां लेस्क्योर ने कहा कि उन्होंने अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से ग्रीनलैंड पर कब्ज़े या सैन्य कार्रवाई की कोई भी कोशिश एक लाल रेखा पार करना होगा। लेस्क्योर के अनुसार, ऐसा कदम न सिर्फ राजनीतिक बल्कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक रिश्तों को भी गंभीर रूप से खतरे में डाल देगा।
लेस्क्योर ने कहा,“ग्रीनलैंड एक संप्रभु देश का संप्रभु हिस्सा है और वह देश यूरोपीय संघ का सदस्य है। इसके साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। ” उन्होंने चेताया कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो यह एक पूरी तरह नई दुनिया की शुरुआत होगी, जिसके दूरगामी और अप्रत्याशित परिणाम होंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब फ्रांस, डेनमार्क, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे जैसे नाटो सदस्य देशों ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा मज़बूत करने के लिए वहां सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तैनाती शुरू कर दी है। यह कदम ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए आक्रामक बयानों और कथित आक्रमण की धमकियों के बाद उठाया गया है।
लेस्क्योर ने ट्रंप प्रशासन को एक विरोधाभास बताते हुए कहा कि वह कभी सहयोगी की तरह व्यवहार करता है और कभी अप्रत्याशित विरोधी की तरह। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि संवाद बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। “जहां हम असहमत हैं, वहां भी बातचीत जारी रहनी चाहिए, बशर्ते वे सीमाएं न लांघी जाएं जिन्हें पार नहीं किया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा।
इसी बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की कि फ्रांस ग्रीनलैंड में उसकी रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए थल, वायु और समुद्री संसाधन तैनात करेगा। ट्रंप का नाम लिए बिना मैक्रों ने दुनिया में उभर रहे नए उपनिवेशवाद की आलोचना की और कहा कि यूरोप को अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए बिना उकसावे के, लेकिन दृढ़ता से मौजूद रहना होगा।
मैक्रों पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर किसी यूरोपीय सहयोगी की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाया गया, तो इसके परिणाम अभूतपूर्व होंगे। उनके कार्यालय के अनुसार, फ्रांस इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नज़र बनाए हुए है और डेनमार्क की संप्रभुता के साथ पूरी एकजुटता में खड़ा रहेगा। ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ता यह तनाव न सिर्फ अमेरिका-यूरोप संबंधों की परीक्षा बनता दिख रहा है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन के लिए भी एक संवेदनशील मोड़ साबित हो सकता है।
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