फिल्म के कुछ डायलॉग्स जैसे ‘जो डर गया, समझो मर गया’, ‘अब तेरा क्या होगा कालिया’ और ‘ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर’ आज भी हर उम्र के दर्शकों की जुबां पर हैं। ये डायलॉग्स सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की यादों का हिस्सा बन गए हैं।
रमेश सिप्पी का जन्म 23 जनवरी 1947 को पाकिस्तान के कराची में हुआ। उनके पिता, गोपालदास परमानंद सिप्पी, जिन्हें जीपी सिप्पी कहा जाता है, बॉलीवुड के मशहूर निर्माता थे। विभाजन के बाद सिप्पी परिवार मुंबई आकर बस गया।
रमेश सिप्पी ने अपने करियर की शुरुआत 1971 में आई फिल्म ‘अंदाज’ से की। इस फिल्म में शम्मी कपूर और हेमा मालिनी जैसे सितारे थे और फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद उन्होंने 1972 में ‘सीता और गीता’ बनाई, जिसमें हेमा मालिनी ने डबल रोल निभाया। यह फिल्म भी सफल रही और रमेश सिप्पी की पहचान एक कुशल निर्देशक के रूप में स्थापित हुई।
1975 में आई उनकी सबसे बड़ी फिल्म ‘शोले’ ने बॉलीवुड की दिशा ही बदल दी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जया भादुड़ी, हेमा मालिनी और संजीव कुमार जैसे दिग्गज कलाकार थे।
शुरुआत में कुछ आलोचकों ने फिल्म को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां की थीं और कहा कि ये फिल्म इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन, जब फिल्म रिलीज हुई तो दर्शकों ने इसकी कहानी और डायलॉग्स को तुरंत अपना लिया और फिल्म लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों में चली।
रमेश सिप्पी के निर्देशन में ‘शोले’ के अलावा भी कई सुपरहिट फिल्में बनीं। उन्होंने ‘शक्ति’, ‘सागर’, ‘शान’ और ‘अकेला’ जैसी फिल्में बनाईं। ‘शक्ति’ में अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार जैसे सितारे एक साथ नजर आए।
रमेश सिप्पी ने अपने करियर में कई पुरस्कार भी जीते। 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में योगदान दिया, बल्कि रमेश सिप्पी एकेडमी ऑफ सिनेमा एंड एंटरटेनमेंट की स्थापना करके नए फिल्ममेकरों को प्रशिक्षित भी किया। उनकी फिल्मों में तकनीकी नवाचार, बड़ी स्टार कास्ट, और मजबूत कहानी हमेशा प्रमुख रही।



