वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से जुड़ी घटना और मौतों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके उलट पाकिस्तान में हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) 2026 के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों से होने वाली मौतों में 6% की वृद्धि हुई है, जिससे वह इस सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।
ऑस्ट्रेलिया स्थित अर्थशास्त्र और शांति संस्थान द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011 के बाद पहली बार पाकिस्तान सबसे अधिक आतंक प्रभावित देश बना है, जिसने पिछले दो वर्षों से शीर्ष पर रहे बुर्किना फासो को पीछे छोड़ दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी मौतें पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इसके पीछे मुख्य रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) हमलों में तेज़ी को जिम्मेदार ठहराया गया है।
वहीं पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वा सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहां 2025 में कुल आतंकी हमलों का 74% और मौतों का 67% दर्ज किया गया।
रिपोर्ट में TTP को 2025 का दुनिया का तीसरा सबसे घातक आतंकी संगठन बताया गया है, जो इस्लामिक स्टेट और जमात नुसरत अल-इस्लाम वल मुस्लिमीन (जेएनआईएम) के बाद आता है। हालांकि इन दोनों संगठनों से जुड़ी मौतों में गिरावट आई, जबकि TTP की हिंसा में 14.8% की वृद्धि दर्ज की गई।
GTI के अनुसार, पाकिस्तान वैश्विक रुझानों से अलग एक अपवाद बनकर उभरा है। जहां 2025 में दुनिया भर में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% की गिरावट आई, वहीं पाकिस्तान में यह आंकड़ा बढ़ा है। यह अफ्रीका के बाहर एकमात्र ऐसा देश है जहां इस स्तर पर आतंकी हिंसा में वृद्धि देखी गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले एक दशक में आतंकवाद का केंद्र पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका से हटकर उप-सहारा अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में चला गया है। इसके बावजूद पाकिस्तान दक्षिण एशिया में एकमात्र देश है जहां आतंकवाद लगातार बढ़ रहा है, जबकि पड़ोसी देशों में इसमें कमी आई है।
पाकिस्तान के लिए TTP लगातार पाँचवें साल सबसे घातक समूह बना हुआ है। यह एक ऐसा समूह है जिसे पाकिस्तान अफगान तालिबान की तरह ही समर्थन देता रहा, और अब पाकिस्तान और TTP के बीच जंग छिड़ चुकी है। TTP के हमलों में वृद्धि का सीधा संबंध अफगान तालिबान के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते संबंधों को भी देखा जा रहा है।
पाकिस्तान सेना द्वारा अफ़ग़ानिस्तान सीमा से सटें रिहायशी इलाकों में लगातार बमबारी और मिसाइल हमलों में सैकड़ों मासूमों की हत्या हुई है, जिसके बदले में TTP ने भी पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों को जोर दिया है।
TTP द्वारा ड्रोन जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल से हमलों की क्षमता और दायरा बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान के उदय ने TTP को संसाधन और रणनीतिक बढ़त दी, जिससे क्षेत्र में हिंसक उग्रवाद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
जहां एक ओर दुनिया आतंकवाद के खतरे से कुछ हद तक राहत महसूस कर रही है, वहीं पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा सूचित करती है की हिंसा से जूझता पाकिस्तान वैश्विक में शांति के लिए पोषिक है।
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