सिरेमिक उद्योग का अगुवा, गुजरात का मोरबी जिला आज भारत की सिरेमिक अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ बन गया है। गुजरात के कुल सिरेमिक उत्पादन में अकेले लगभग 90 फीसदी हिस्सेदारी के साथ मोरबी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादन केंद्र है।
मोरबी आज देश और दुनिया में सिरेमिक उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। शुरुआत में यहां पारंपरिक तरीके से मिट्टी के मटके, दीये, खपरैल और घरेलू मिट्टी के बर्तन बनाए जाते थे। स्थानीय मिट्टी की गुणवत्ता और कारीगरों की कुशलता ने मोरबी के उत्पादों को एक नई पहचान दी। बाद में, वॉल क्लॉक (दीवार घड़ी) उद्योग की शुरुआत हुई।
समय के साथ-साथ, 1970-80 के दशक में रूफ टाइल्स और ग्लेज्ड टाइल्स का उत्पादन शुरू हुआ और धीरे-धीरे मोरबी आधुनिक सिरेमिक उद्योग की दिशा में आगे बढ़ा।
इस वर्ष राजकोट में आयोजित होने वाली दूसरी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) कच्छ-सौराष्ट्र में मोरबी के सिरेमिक क्लस्टर की एक विशेष प्रदर्शनी होगी, जिसमें ‘अद्यतन सिरेमिक्स’, ‘वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स’, ‘एनर्जी-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी’ और नए ‘सिरेमिक पार्क’ की प्रगति मुख्य आकर्षण होंगे।
मोरबी जिले का सिरेमिक क्लस्टर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादक क्लस्टर है। मोरबी जिले में लगभग 1200 सिरेमिक इकाइयां हैं, जिनका कुल सालाना उत्पादन लगभग 60 लाख टन है। ये इकाइयां करीब 9 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती हैं।
मोरबी जिले में गत दो वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं के तहत व्यापक और प्रभावी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जो जिले के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम सिद्ध हो रही है।
मोरबी का सिरेमिक उद्योग वैश्विक बाजार में गुजरात और भारत की मजबूत पहचान बन रहा है। अनुमान के मुताबिक वर्ष 2024-25 के दौरान मोरबी से लगभग 15,000 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। खास बात यह है कि अकेला मोरबी भारत के कुल सिरेमिक निर्यात में 80 से 90 फीसदी का योगदान देता है।
गुजरात का मोरबी जिला सिरामिक क्षेत्र की तरह ही पॉलीपैक उद्योग के क्षेत्र में भी निकट भविष्य में राज्य का एक अग्रणी जिला बन सकता है। अभी मोरबी जिले में पीपी (पॉलीप्रोपाइलिन) वूवन प्रोडक्ट की कुल 150 इकाइयां कार्यरत हैं।
सिरेमिक तथा पॉलीपैक के जैसे ही वॉल क्लॉक और गिफ्ट आर्टिकल उद्योग भी मोरबी में बड़े पैमाने पर विकसित हुआ है। भारत के वॉल क्लॉक उत्पादन में मोरबी जिले के वॉल क्लॉक तथा गिफ्ट आर्टिकल उद्योग की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
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