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भारत में होगा हैमर मिसाइल निर्माण, फ़्रांस के साथ दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर

भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नई मजबूती

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भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक रक्षा संबंधों को नई गति देते हुए मंगलवार को बेंगलुरु में आयोजित छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। यह उच्चस्तरीय बैठक भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंग और फ्रांस की समकक्ष मंत्रीकैथरीन वॉटरिन की उपस्थिति में संपन्न हुई, जिन्होंने संयुक्त रूप से संवाद की अध्यक्षता की।

पहला समझौता 10 वर्षीय व्यापक रक्षा सहयोग समझौते के संशोधन और नवीनीकरण से संबंधित है। इस पर भारत की ओर से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और फ्रांस की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल एरिक पेल्टियर ने हस्ताक्षर किए। इस नवीनीकरण को बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच दोनों देशों की दीर्घकालिक सैन्य साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरा समझौता भारत में हैमर मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन से जुड़ा है। यह समझौता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और सफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के बीच हुआ। बीईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज जैन और साफरान के रक्षा निदेशक अलेक्जेंडर ज़िगलर ने इस समझौते का आदान-प्रदान किया।

हैमर मिसाइलें अपनी सटीक मार्गदर्शित क्षमता के लिए जानी जाती हैं और इनका देश में निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करेगा।

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने फ्रांस को रणनीतिक स्वायत्तता और सशक्त यूरोपीय रक्षा ढांचे का समर्थक बताते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते बहुपक्षीय सहयोग की सराहना की। उन्होंने हालिया भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा साझेदारी को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम बताया।

फ्रांसीसी मंत्री कैथरीन वात्रां ने कहा कि रक्षा सहयोग भारत-फ्रांस संबंधों की आधारशिला है। उन्होंने संयुक्त सैन्य अभ्यास, सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बताया। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच उन्होंने भारत को फ्रांस का अनिवार्य साझेदार बताया।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस के बीच रक्षा व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन जैसी संस्थाओं की मौजूदगी के कारण बेंगलुरु रक्षा और एयरोस्पेस सहयोग का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये समझौते इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन को सुदृढ़ करने और उन्नत रक्षा तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

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