‘कालेश्वर’ का अर्थ है ‘समय के स्वामी’ (भगवान शिव का एक रूप) और यह मुद्रा व्यक्ति को समय के प्रति सचेत कर टालमटोल की आदत को सुधारने में भी मदद करती है।
हमारे हाथ सिर्फ काम करने के लिए नहीं बने हैं, बल्कि इनमें ऊर्जा को साधने की भी अद्भुत शक्ति छिपी है। योग शास्त्र में कहा गया है कि हमारी उंगलियों में पांच तत्वों का वास होता है – अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल। जब हम उंगलियों को एक खास तरीके से मिलाते हैं, तो शरीर के अंदर की ऊर्जा का प्रवाह बदल जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मुद्रा चंचल मन को शांत करने, मानसिक तनाव को दूर करने और बुरी आदतों या व्यसनों से मुक्ति पाने के लिए एक सर्वश्रेष्ठ पूरक योग अभ्यास है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मन में चिंता, गुस्सा, डर और नकारात्मक सोच हावी होने लगती है, तब कालेश्वर मुद्रा मन को शांत करने का सबसे सरल उपाय बन जाती है।
इसी के साथ ही, यह मुद्रा इच्छाशक्ति को मजबूत करती है, जिससे सिगरेट, शराब या किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन व तलब को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इस मुद्रा के अभ्यास करने का समय भी बताया गया है।
आयुष मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यासकर्ता इस मुद्रा को करते समय इस बात का भी ध्यान दें कि इसे करते समय उंगलियों को आपस में बहुत जोर से या कसकर न दबाएं। यदि शरीर में वात (वायु तत्व) का असंतुलन हो, तो इस मुद्रा का अभ्यास संयम और सीमित अधिक में ही करें।
