30.1 C
Mumbai
Friday, November 6, 2026
होमदेश दुनियामाता-पिता की आय ओबीसी क्रीमी लेयर का निर्धारण नहीं कर सकती: सुप्रीम...

माता-पिता की आय ओबीसी क्रीमी लेयर का निर्धारण नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट!

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 11 मार्च 2026 को दिए गए अपने फैसले में निर्धारित सिद्धांत, सीएसई 2025 के माध्यम से चयनित ओबीसी उम्मीदवारों को सेवा आवंटन को नियंत्रित करेगा।

Google News Follow
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दोहराया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ चाहने वाले उम्मीदवारों के क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय माता-पिता की आय को यंत्रवत् रूप से शामिल नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारण पर लागू सरकारी निर्देशों की व्याख्या करने वाला उनका पूर्व निर्णय पुनर्विचार के लिए खुला नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा इस निर्णय में संशोधन की मांग को खारिज कर दिया।

यह स्पष्टीकरण केंद्र द्वारा दायर विभिन्न आवेदनों का निपटारा करते हुए दिया गया, जिसमें सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2025 में अनुशंसित उम्मीदवारों के लिए ओबीसी क्रीमी लेयर का निर्धारण करने के लिए पूर्व-मौजूदा मानदंडों को लागू करने और पूर्व निर्णय के पूर्वव्यापी प्रभावों को सीमित करने की अनुमति मांगी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 11 मार्च 2026 को दिए गए अपने फैसले में निर्धारित सिद्धांत, सीएसई 2025 के माध्यम से चयनित ओबीसी उम्मीदवारों को सेवा आवंटन को नियंत्रित करेगा। इसकी वजह आवंटन प्रक्रिया को अभी तक अंतिम रूप न दिया जाना है।

इसमें कहा गया कि आवंटन की प्रक्रिया अभी लंबित है और 11 मार्च 2026 के फैसले के कार्यान्वयन को स्थगित करने का कोई ठोस या उचित कारण नहीं है, इसलिए उक्त फैसले में व्याख्या किए गए क्रीमी लेयर सिद्धांत के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से चयनित ओबीसी उम्मीदवारों को सेवाओं का आवंटन किया जाएगा।

पिछला फैसला उन उम्मीदवारों से संबंधित था, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में कार्यरत उनके माता-पिता की आय को ध्यान में रखते हुए उन्हें क्रीमी लेयर में शामिल किए जाने के कारण ओबीसी आरक्षण लाभ से वंचित कर दिया गया था।

उम्मीदवारों ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के समक्ष इस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसके बाद मद्रास, दिल्ली और केरल हाई कोर्ट्स ने उनके मामलों में राहत प्रदान की।

इस वर्ष मार्च में केंद्र की अपीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह फैसले में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार उम्मीदवारों और हस्तक्षेपकर्ताओं के दावों पर विचार करे और छह महीने के भीतर निर्देशों को लागू करे।

अपने नवीनतम आदेश में न्यायमूर्ति नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व के फैसले के अनुसार पूर्ण हो चुके चयन, नियुक्तियों या सेवा आवंटनों को पुनः खोलने या अन्य कर्मचारियों की वरिष्ठता में कोई बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, पीठ ने कहा कि 1993 के कार्यालय ज्ञापन और 2004 के स्पष्टीकरण पत्र की व्याख्या संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत बाध्यकारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के ऐसे मामले, जो अदालतों, न्यायाधिकरणों या अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष लंबित हैं। मार्च के फैसले में दिए गए स्पष्टीकरण को ध्यान में रखते हुए उनके अपने गुणों के आधार पर विचार किए जा सकते हैं।

केंद्र ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों और अन्य संगठनों में पदों और सरकारी पदों के बीच समानता स्थापित करने के लिए दो साल का समय मांगा था, साथ ही क्रीमी लेयर का निर्धारण करने के लिए एक समान तंत्र तैयार करने का भी अनुरोध किया था।

इस प्रक्रिया के लिए कोई समयसीमा निर्धारित करने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ये मामले कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय के अनुपालन के लिए दो महीने का समय बढ़ाया और आवेदनों का निपटारा किया।

यह भी पढ़ें-
National Stock Exchange

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited
[td_block_social_counter open_in_new_window="y" style="style6 td-social-boxed" block_template_id="td_block_template_9" border_color="#fbd54a" f_header_font_size="26" f_header_font_weight="700" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXRvcCI6IjAiLCJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJwYWRkaW5nLXRvcCI6IjAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn19" custom_title="हमें फॉलो करें" facebook="NewsDankaHindi" twitter="NewsDanka" youtube="channel/UCqtL0xCsgAmB3XXrh9nln2Q" manual_count_twitter="526" f_header_font_family="668"]

अन्य लेटेस्ट खबरें