हमारा शरीर समय-समय पर संकेत देता है, बस ज़रूरत है उन्हें सही तरीके से समझने की। पेशाब (मूत्र) ऐसा ही एक प्राकृतिक संकेतक है, जो हमारी सेहत की कई परतों को उजागर करता है। चिकित्सकों का कहना है कि पेशाब का रंग, मात्रा, गंध और बारंबारता-इन चार बातों पर ध्यान देकर किडनी, लीवर, डायबिटीज, संक्रमण और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं की शुरुआती पहचान की जा सकती है।
सामान्य रूप से हल्का पीला या साफ पेशाब अच्छी सेहत और पर्याप्त पानी पीने का संकेत माना जाता है। अगर पेशाब गहरा पीला या नारंगी रंग का हो, तो यह शरीर में पानी की कमी की ओर इशारा करता है। वहीं, अत्यधिक पारदर्शी पेशाब जरूरत से ज्यादा पानी या कुछ मामलों में हार्मोनल असंतुलन का संकेत भी हो सकता है।
लाल या गुलाबी रंग का पेशाब चिंताजनक हो सकता है, क्योंकि यह मूत्र में खून की मौजूदगी दर्शाता है। यह किडनी स्टोन, यूरिन इन्फेक्शन या किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। झागदार पेशाब प्रोटीन लीकेज का संकेत है, जो किडनी की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े करता है। वहीं, तीखी बदबू या जलन के साथ पेशाब आना यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) की आम पहचान है।
पेशाब की मात्रा और बार-बार पेशाब आना भी अहम संकेत देता है। दिन में बहुत बार पेशाब लगना, खासकर रात में, डायबिटीज या प्रोस्टेट संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकता है। अगर पेशाब बहुत कम हो रहा है, तो यह किडनी की समस्या या गंभीर डिहाइड्रेशन का लक्षण हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेशाब में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीना और समय-समय पर मेडिकल जांच से कई बीमारियों को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सकता है। सच तो यही है, पेशाब को समझना, अपने शरीर की भाषा को समझने जैसा है, और यही सतर्कता बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी बन सकती है।
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