बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और डॉ. नीला गोखले शामिल हैं, ने कहा कि फिल्म के निर्माता 8 अगस्त तक सीबीएफसी की पुनरीक्षण समिति के समक्ष आवेदन करें। इसके बाद समिति 11 अगस्त तक आपत्तिजनक दृश्यों या संवादों की जानकारी निर्माताओं को देगी, और 13 अगस्त तक अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस मामले पर हाईकोर्ट अगली सुनवाई 14 अगस्त को करेगा।
कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि फिल्म की रिलीज में हो रही देरी को रोका जा सके और समय पर प्रमाणन प्रक्रिया पूरी हो। कोर्ट के इस आदेश से फिल्म निर्माताओं को थोड़ी राहत मिली है।
फिल्म के निर्माताओं ने अपनी याचिका में सीबीएफसी पर मनमाना और गैरकानूनी मांगों के गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया कि फिल्म को सर्टिफिकेट दिलाने के लिए 5 जून को आवेदन किया गया था, लेकिन तय 15 दिनों की समयसीमा बीत जाने के बावजूद सीबीएफसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
निर्माताओं का सबसे गंभीर आरोप सीबीएफसी द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) मांगने को लेकर है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की मांग का किसी भी कानून में कोई प्रावधान नहीं है। यह फिल्म की रिलीज में जानबूझकर देरी करने की कोशिश है। उन्होंने इसे अवैध, अनुचित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया है।
‘अजेय’ फिल्म लेखक शांतनु गुप्ता की चर्चित पुस्तक ‘द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर’ से प्रेरित बताई जा रही है। यह फिल्म योगी आदित्यनाथ के जीवन के अनछुए पहलुओं और महंत से मुख्यमंत्री तक के सफर को समेटे हुए है।
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