सर्दियों में शरीर को ऊर्जा देने के लिए कई तरह की चीजों का सेवन किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड और दक्षिण भारत की एक दाल शरीर को ऊर्जा देने से लेकर पथरी को गलाने में भी महत्वपूर्ण है? हम बात कर रहे हैं कुलथी की दाल की, जो सर्दियों में शरीर को भरपूर पोषण प्रदान करती है और कई रोगों से भी बचाती है।
उत्तराखंड और दक्षिण भारत में कुलथी की दाल की पैदावार होती है और ये वहां की थाली का मुख्य आहार भी है। इसे हॉर्स ग्राम भी कहते हैं। आयुर्वेद में साधारण सी दिखने वाली दाल को औषधियों गुणों से भरपूर माना जाता है और सर्दियों में इसका सेवन बहुत लाभकारी माना गया है। कुलथी की दाल की तासीर गर्म होती है, और ये वात और कफ को भी संतुलित करने में मदद करती है। तो चलिए, आज आपको कुलथी की दाल के सेवन के फायदे बताते हैं।
कुलथी की दाल की तासीर गर्म होती है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती है। इसके सेवन से शरीर को गर्माहट मिलती है और शरीर भी ऊर्जा से भरा रहता है।
अगर मोटापा परेशान कर रहा है और सर्दियों में तेजी से वजन बढ़ता है, तो कुलथी की दाल वरदान है। ये ऊर्जा से भरपूर होती है और एक बार सेवन के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती है। इससे शरीर को पौष्टिक तत्व भी पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं।
कुलथी की दाल कफ और वात दोष को संतुलित करती है। सर्दियों में वात दोष की वृद्धि बढ़ जाती है और कफ की समस्या भी परेशान करती है। ऐसे में कुलथी की दाल कफ को ढीला करने में मदद करती है और संक्रमण से लड़ने की ताकत भी देती है।
कुलथी की दाल में भरपूर मात्रा में लिथोट्रिप्टिक गुण होता है, जो पथरी को तोड़ने और गलाने में मदद करता है। इसके लिए कुलथी की दाल का सेवन किया जा सकता है।
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