यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा को कैसे मिला भारतीय OCI कार्ड

भारत-EU के व्यापार समझौते के दौरान एंतोनियो कोस्टा ने दिखाया था OCI कार्ड

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा को कैसे मिला भारतीय OCI कार्ड

How did European Council President António Costa obtain an Indian OCI card?

भारत-यूरोपीय संघ (EU) व्यापार समझौते के ऐतिहासिक ऐलान के दौरान एक अप्रत्याशित क्षण देखने को मिला। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा ने सार्वजनिक रूप से अपना ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड निकाला और भारत से अपने निजी संबंधों के बारे में बताया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन भी मौजूद थीं। कोस्टा के इस व्यक्तिगत बयान पर प्रधानमंत्री मोदी मुस्कराते नजर आए।

मंगलवार को संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एंतोनियो कोस्टा ने कहा, “मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं एक ओवरसीज़ इंडियन सिटीजन भी हूं।” यह कहते हुए उन्होंने अपनी जेब से OCI कार्ड निकाला। इसके बाद उन्होंने गोवा से अपने पारिवारिक संबंधों का उल्लेख किया, जिसकी जानकारी वहां मौजूद कई लोगों को पहले नहीं थी।

कोस्टा ने कहा, “जैसा कि आप समझ सकते हैं, मेरे लिए इसका एक विशेष महत्व है। मुझे गोवा में अपनी जड़ों पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आता है और यूरोप तथा भारत के बीच का यह संबंध मेरे लिए व्यक्तिगत भी है।” उन्होंने भारत-EU साझेदारी को केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भों से भी जुड़ा बताया।

गोवा से क्या है एंतोनियो कोस्टा का रिश्ता

एंतोनियो कोस्टा के पिता का जन्म और पालन-पोषण गोवा में हुआ था, जो उस समय पुर्तगाल का उपनिवेश था। गोवा की मुक्ति के बाद, 18 वर्ष की आयु में उनके पिता पुर्तगाल चले गए। बचपन में एंतोनियो कोस्टा को कोंकणी में प्रचलित उपनाम ‘बाबुश’ से पुकारा जाता था, जिसका उन्होंने अपने संबोधन में भी उल्लेख किया।

कोस्टा के दादा का जन्म मार्गांव में हुआ था और उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा वहीं बिताया। उनके पिता ऑरलैंडो कोस्टा एक प्रसिद्ध लेखक और कवि थे, जिनकी रचनाओं में गोवा की संस्कृति और सामाजिक जीवन की गहरी झलक मिलती है। कोस्टा ने एक पूर्व अवसर पर कहा था, “मेरे पिता लिस्बन चले गए, लेकिन उन्होंने कभी गोवा नहीं छोड़ा। गोवा हमेशा उनके लेखन में मौजूद रहा।”

एंतोनियो कोस्टा जब वह पुर्तगाल के प्रधानमंत्री थे तब 2017 में भारत आए थे। उस यात्रा के दौरान उन्होंने अपने पिता की एक साहित्यिक कृति के अंग्रेज़ी अनुवाद का विमोचन किया था। उसी दौरान उन्होंने मार्गांव स्थित अपने पैतृक घर का भी दौरा किया था, जो अब भी अबादे फारिया रोड पर मौजूद है और जहां उनके विस्तारित परिवार के सदस्य रहते हैं।

हालांकि आज एंतोनियो कोस्टा ब्रुसेल्स से यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में वैश्विक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन भारत-EU व्यापार समझौते के ऐलान के दौरान दिया गया उनका संबोधन यह संकेत देता है कि गोवा और भारत से जुड़ी स्मृतियां और भावनात्मक संबंध आज भी उनके भीतर जीवित हैं। यह क्षण भारत और यूरोप के रिश्तों में मानवीय जुड़ाव का एक अनोखा उदाहरण बनकर सामने आया।

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