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Sunday, February 22, 2026
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर कैसे किया वार!

राष्ट्रपति को नहीं है ऐसा अधिकार

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अमेरिकी सर्वोच्च न्यायलय ने शुक्रवार (20 फरवरी) को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके व्यापक वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को असंवैधानिक करार दे दिया। अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि 1977 के आपातकालीन कानून के तहत राष्ट्रपति को आयात पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए बहुमत के फैसले में कहा गया कि इंटरेनशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ या शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देता। संविधान के अनुच्छेद I, धारा 8 के तहत यह अधिकार कांग्रेस के पास सुरक्षित है। अदालत ने मेजर क्वेश्चन डॉक्ट्रिन लागू करते हुए कहा कि बड़े आर्थिक और राजनीतिक महत्व के मामलों में कार्यपालिका को स्पष्ट संसदीय अनुमति आवश्यक होती है।

रॉबर्ट्स ने अपने निर्णय में लिखा, “राष्ट्रपति ने एकतरफ़ा तौर पर अनलिमिटेड अमाउंट, ड्यूरेशन और स्कोप के टैरिफ़ लगाने की एक्स्ट्रा पावर का इस्तेमाल किया है।” साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने माना की IEEPA में टैरिफ या ड्यूटी का कोई उल्लेख नहीं है।

यह फैसला ट्रंप के अप्रैल 2025 में शुरू किए गए ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ कार्यक्रम के मूल ढांचे को निरस्त करता है। इस योजना के तहत अधिकांश देशों पर 10% का आधारभूत टैरिफ लगाया गया था। इसके अतिरिक्त चीन के कुछ आयातों पर 145% तक, कनाडा और मैक्सिको के अधिकांश सामान पर 25% तथा यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, भारत और ब्राज़ील पर भी उच्च दरें लागू की गई थीं। IEEPA का उपयोग कर इतने व्यापक पैमाने पर टैरिफ लगाने का यह पहला मामला था।

अदालत के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने भी स्वीकार किया कि शांति काल में राष्ट्रपति को स्वाभाविक रूप से टैरिफ लगाने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है। फैसले में कहा गया, “इसके बजाय, यह चुनौती दिए गए टैरिफ का बचाव करने के लिए पूरी तरह से IEEPA पर निर्भर है, ‘रेगुलेट’ और ‘इम्पोर्ट’ शब्दों का इस्तेमाल टैरिफ पॉलिसी तय करने के लिए कांग्रेस की शक्ति का एक बड़ा हिस्सा सौंपने के लिए किया गया है, जिससे राष्ट्रपति को किसी भी देश के किसी भी प्रोडक्ट पर अनलिमिटेड अमाउंट और समय के लिए टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।

यह निर्णय निचली अदालतों अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय और संघीय सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय के फैसलों को बरकरार रखता है। हालांकि, Section 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा प्रावधान) और Section 301 (अनुचित व्यापार प्रावधान) के तहत लगाए गए टैरिफ इस निर्णय से प्रभावित नहीं होंगे।

बहुमत में जस्टिस सोनिया सोटोमेयर, एलेना कगन, केतनजी ब्राउन जैक्सन, नील गोरसच और एमी कोनी बैरेट शामिल रहें। वहीं क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवानौघ ने असहमति जताई। असहमति में कावानॉ ने तर्क दिया कि IEEPA में “regulate … importation” शब्दावली पारंपरिक व्यापार नीति उपकरण के रूप में टैरिफ को शामिल करती है।

अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पहले से वसूले गए 130 अरब डॉलर से अधिक, कुछ अनुमानों के अनुसार 175 अरब डॉलर का क्या होगा। इस मुद्दे को निचली अदालतों को वापस भेज दिया गया है, जिससे आयातकों के लिए प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

ट्रंप, जिन्होंने 2024 के चुनाव अभियान और अपने दूसरे कार्यकाल के एजेंडे में आक्रामक टैरिफ को केंद्रीय मुद्दा बनाया था, ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि टैरिफ रद्द हुए तो यह पैसा वापस देना होगा, जो अर्थशास्त्रीय आपदा साबित होगा। अदालत के इस फैसले के बाद अब अमेरिकी व्यापार नीति और वैश्विक बाजारों पर इसके प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति अभी स्पष्ट नहीं; भारतीय वस्तुओं पर 10% या 18% टैरिफ?

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