वर्ष 2025 में राष्ट्रीय शेयर बाजार ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। जहां प्रमुख सूचकांकों में मजबूती देखने को मिली, वहीं स्मॉलकैप और माइक्रोकैप सेगमेंट पर दबाव बना रहा। निफ्टी-50 ने साल के अंत तक 10.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। इसी दौरान डॉलर इंडेक्स में तेज गिरावट से वैश्विक बाजार की परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला।
अगर 2024 और 2025 की तुलना की जाए तो एनएसई की प्रगति और अधिक मजबूत नजर आती है। 2024 में जहां सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या 2,641 थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 2,898 हो गई। यानी एक साल में 258 नई कंपनियां एनएसई से जुड़ीं। इसी अवधि में कुल बाजार पूंजीकरण भी ₹439 लाख करोड़ से बढ़कर ₹474 लाख करोड़ हो गया, जो करीब 7.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में इक्विटी और ऋण बाजार से कुल ₹19.64 लाख करोड़ की पूंजी जुटाई गई, जो 2024 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। हालांकि आईपीओ की संख्या में गिरावट आई, लेकिन इनके जरिए जुटाई गई राशि में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
आईपीओ से फंड जुटाने में बढ़त
आईपीओ के माध्यम से जुटाई गई राशि पर नजर डालें तो 2024 में यह आंकड़ा ₹1.66 लाख करोड़ था, जो 2025 में बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ हो गया। मेनबोर्ड आईपीओ की संख्या भी बढ़ी—2024 में 90 से बढ़कर 2025 में 103 हो गई। इनसे जुटाई गई राशि ₹1.59 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.72 लाख करोड़ तक पहुंच गई। वर्ष का सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई का रहा, जिससे ₹27,859 करोड़ जुटाए गए।
निफ्टी में मजबूती, स्मॉलकैप पर दबाव
निफ्टी-50 का स्तर 2024 में 23,645 था, जो 2025 में बढ़कर 26,130 पर पहुंच गया—यानी 10.5 प्रतिशत की वार्षिक बढ़त। निफ्टी (डॉलर टर्म्स), निफ्टी नेक्स्ट, निफ्टी 500 और निफ्टी मिडकैप 150 में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली। हालांकि मिडकैप में सीमित तेजी रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
ब्याज दरों में नरमी, बॉन्ड यील्ड घटी
भारत में 1-वर्ष, 5-वर्ष और 10-वर्ष की सरकारी बॉन्ड यील्ड में उल्लेखनीय गिरावट आई है। विशेष रूप से 1-वर्ष की यील्ड में 107 बेसिस पॉइंट्स की कमी दर्ज की गई, जिससे ऋण बाजार को सहारा मिला।
प्राथमिक बाजार में गतिविधि
2025 में एनएसई पर कुल 220 आईपीओ आए। संख्या भले ही 2024 से कम रही हो, लेकिन इनके जरिए जुटाई गई पूंजी बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गई। मेनबोर्ड आईपीओ के मामले में महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक शीर्ष राज्य रहे।
निवेशकों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर
2025 के अंत तक देश में पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.5 करोड़ के पार पहुंच गई। सिर्फ एक साल में 1.6 करोड़ नए निवेशक बाजार से जुड़े। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से सबसे अधिक नए निवेशकों का पंजीकरण हुआ।
प्रमुख आंकड़े:
निफ्टी 50: +10.5% (23,645 → 26,130)
निफ्टी मिडकैप 150: +5.4%
निफ्टी स्मॉलकैप 250: −6%
डॉलर इंडेक्स: −9.4%
बाजार पूंजीकरण:
एनएसई सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप:
₹439 लाख करोड़ → ₹474 लाख करोड़ (+7.9%)
मार्केट कैप/जीडीपी अनुपात: 138% → 135%
भारत की बॉन्ड यील्ड:
10-वर्ष: 6.8% → 6.6%
5-वर्ष: 6.7% → 6.3%
1-वर्ष: 6.7% → 5.6%
आईपीओ (2025):
कुल आईपीओ: 220
जुटाई गई राशि: ₹1.78 लाख करोड़
मेनबोर्ड आईपीओ: 103
एसएमई आईपीओ: 117
मेनबोर्ड आईपीओ में अग्रणी राज्य (2025):
महाराष्ट्र: ₹46,512 करोड़
दिल्ली: ₹41,923 करोड़
कर्नाटक: ₹36,293 करोड़
बीएमसी चुनाव: राज ठाकरे की सड़क छाप राजनीति ने एक फिर उगला जहर!



