25 C
Mumbai
Saturday, January 17, 2026
होमदेश दुनियाभारत ने अमेरिकी बॉन्ड में की कटौती तो RBI गवर्नर से मिलने...

भारत ने अमेरिकी बॉन्ड में की कटौती तो RBI गवर्नर से मिलने पहुंचे अमेरिकी राजदूत

आर्थिक सहयोग पर की चर्चा

Google News Follow

Related

भारत में नव-नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शनिवार (17 जनवरी) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की। गोर ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए कहा कि उन्हें गवर्नर मल्होत्रा से मिलकर खुशी हुई और दोनों के बीच अधिक सहयोग के क्षेत्रों, विशेषकर अत्याधुनिक अमेरिकी तकनीक को लेकर चर्चा हुई।

बता दें की, भारत ने वर्ष 2025 के दौरान अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कटौती की है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच भारत की अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में होल्डिंग लगभग 21 प्रतिशत घटकर 241.4 अरब डॉलर से 190.7 अरब डॉलर रह गई। यह चार वर्षों में पहली बार है जब भारत की अमेरिकी ट्रेज़री होल्डिंग में सालाना गिरावट दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, यह कटौती 50 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली के बराबर है, जिसे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की रिज़र्व डाइवर्सिफिकेशन रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस रणनीति के तहत विदेशी मुद्रा भंडार को केवल अमेरिकी बॉन्ड तक सीमित रखने के बजाय अन्य मुद्राओं और सोने में निवेश बढ़ाया जा रहा है।

भारत इस रुख में अकेला नहीं है। चीन और अन्य ब्रिक्स देश भी हाल के वर्षों में अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड से दूरी बनाते दिखे हैं। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी लगातार घटाई है, जो कभी 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक थी और अब घटकर लगभग 680 अरब डॉलर के आसपास बताई जा रही है।

हालांकि कटौती के बावजूद भारत अब भी अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड के शीर्ष धारकों में छठे स्थान पर बना हुआ है। अक्टूबर 2025 में ही चीन और ब्राज़ील जैसे ब्रिक्स देशों ने मिलकर 28.8 अरब डॉलर के अमेरिकी कर्ज़ बॉन्ड बेचे थे, जो वैश्विक स्तर पर बदलती निवेश प्राथमिकताओं की ओर इशारा करता है।

अमेरिकी राजदूत और RBI गवर्नर की इस मुलाकात ने अटकलों को भी जन्म दिया है कि क्या इस चर्चा में अमेरिकी बॉन्ड होल्डिंग में कटौती और व्यापक भारत–अमेरिका आर्थिक संबंधों पर भी बात हुई। दोनों देश एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के चलते यह प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाई है।

ऐसे में, यह मुलाकात अमेरिका भारत के कम होते विश्वास को बनाए रखने के लिए निवेश रणनीतियों और अमेरिकी आर्थिक संबंधों बनाए रखने के लिए की गई। हालांकि अमेरिकी पक्ष भी इस बात से भली भांति परिचित होगा की वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता और दोनों देशो के बीच डोनाल्ड ट्रंप की अतिरक्षवादी नीति से तनाव बढ़े हुए हैं और अमेरिकी बॉन्ड में कटौती इसी का परिणाम है।

यह भी पढ़ें:

गोवा में रूसी नागरिक द्वारा प्रेमिका की हत्या; आरोपी गिरफ्तार

40 से ज़्यादा क्रिमिनल केस वाला सीनियर नक्सली कमांडर पापा राव ढेर

फ्रांस से ₹3.25 लाख करोड़ के राफेल सौदे में भारत की सख्त अपरिवर्तनीय शर्तें

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,408फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
287,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें