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अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के बावजूद भारत के निर्यात में वृध्दी

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अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के बावजूद भारत के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने गुरुवार (27 नवंबर)को संसदीय स्थायी समिति को बताया कि अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में भारत के आउटबाउंड शिपमेंट्स पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक रहे हैं। यह जानकारी संसदीय स्थायी समिति की वाणिज्य पर  बैठक में दी गई, जिसकी अध्यक्षता तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद डोला सेन ने की। समिति की बैठक का मुख्य एजेंडा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की समीक्षा और अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के प्रभाव का आकलन था। बैठक में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत प्रस्तुति दी।

अक्टूबर माह में भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात 14.5% की बढ़ोतरी के साथ दर्ज किया गया, जो पिछले महीनों की तुलना में उल्लेखनीय है। 27 अगस्त को अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह प्रभावी होने के बाद सितंबर में निर्यात में गिरावट देखी गई थी, लेकिन अक्टूबर की वृद्धि ने उद्योग जगत में नई उम्मीद जगाई है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में कहा कि केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था में घरेलू उत्पादन की हिस्सेदारी निर्यात क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अमेरिकी टैरिफ ने कुछ क्षेत्रों पर दबाव बनाया है।

विभिन्न दलों के सदस्यों ने सवाल उठाया कि एक विकासशील और कल्याणकारी देश होने के बावजूद भारत को अमेरिकी टैरिफ का निशाना क्यों बनाया गया। विपक्षी सांसदों ने चिंता जताई कि जब भारत अमेरिका को एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार मानता है, तब इस तरह के प्रतिबंध अप्रत्याशित और असहज करने वाले हैं।

समिति के सामने कॉफी बोर्ड, टी बोर्ड और सिल्क बोर्ड से जुड़े व्यापारियों द्वारा उठाई गई समस्याएं भी रखी गईं। सदस्यों ने कहा कि डॉलर की लगातार मजबूती, रुपये की गिरावट और टेक्सटाइल जैसे कृषि-आधारित उद्योगों पर दबाव बने रहने से उद्योग जगत परेशान है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को पर्याप्त राहत न मिलने का मुद्दा भी उठाया गया।

बैठक में वाणिज्य मंत्रालय ने आश्वस्त किया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित उत्तर समिति को सौंपेगा। समिति की अगली बैठक 16 दिसंबर को होगी, जिसमें विदेश सचिव और अन्य MEA अधिकारी भी पेश होंगे। उद्योग संगठनों FICCI और CII को भी बुलाए जाने की संभावना है। बैठक में डोला सेन के अलावा कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी, जेडीयू के गिरिधर यादव, और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, प्रवीण खंडेलवाल तथा रमेश अवस्थी भी मौजूद रहे।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी है, वहीं भारतीय उद्योग नए बाज़ारों में घरेलू उत्पादों के लिए अवसर तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रुझान जारी रहता है, तो यह भारत के व्यापार संतुलन और निर्यात क्षमताओं के लिए सकारात्मक संकेत साबित हो सकता है।

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