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भारत को ट्रंप की गाजा पीस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के न्योता, लेकीन चाहिए 1 बिलियन डॉलर

US एम्बेसडर सर्जियो गोर ने दी जानकारी

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US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा के पुनर्निर्माण के लिए ‘पीस बोर्ड’ बनाने का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पीस बोर्ड की परमानेंट मेंबरशिप के लिए संबंधित देशों को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8 हजार करोड़ रुपये) की फाइनेंशियल मदद देनी पड़ सकती है। इस पीस बोर्ड का मुख्य मकसद गाजा पट्टी में संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण, शांति और स्थिरता लाना होगा। बताया जा रहा है कि इस बोर्ड का मकसद युद्धग्रस्त इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना, आम लोगों को मानवीय मदद देना और लंबे समय तक शांति के लिए कोशिश करना है। इस बीच, US ने भारत को भी इस बोर्ड में शामिल होने के लिए बुलाया है।

भारत में US एम्बेसडर सर्जियो गोर ने कन्फर्म किया है कि US ने भारत को गाजा युद्ध खत्म करने के लिए प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अनाउंस की गई ‘गाजा पीस कॉन्फ्रेंस’ में शामिल होने के लिए बुलाया है। गोर ने लिखा, “मुझे प्रेसिडेंट ट्रंप की तरफ से प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी को पीस काउंसिल में शामिल होने के लिए बुलाते हुए गर्व हो रहा है, जिसका मकसद गाजा में हमेशा के लिए शांति लाना है। काउंसिल स्टेबिलिटी और खुशहाली पाने के लिए असरदार गवर्नेंस को सपोर्ट करेगी।” उन्होंने यह इनविटेशन X पर भी शेयर किया।

ट्रंप ने गाजा पीस काउंसिल बनाने का ऐलान किया और इसे इज़राइल-हमास युद्ध खत्म करने के US-समर्थित प्लान में एक ज़रूरी कदम बताया। भारत के अलावा, कम से कम चार और देशों ने कहा कि US ने उन्हें कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए इनवाइट किया है। जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस और पाकिस्तान ने इनविटेशन कन्फर्म किया। इससे पहले, कनाडा, तुर्की, मिस्र, पैराग्वे, अर्जेंटीना और अल्बानिया ने भी कहा था कि उन्हें इनवाइट किया जाएगा। अभी तक यह साफ़ नहीं है कि कुल कितने देशों से कॉन्टैक्ट किया गया है। दुनिया के नेताओं के कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की उम्मीद है।

गाजा पीस काउंसिल क्या करेगी?

इस प्रस्तावित पीस कॉन्फ्रेंस का मकसद गाजा में हो रहे डेवलपमेंट पर नज़र रखना है। इसके काम में गाजा में एक नई फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी बनाना, एक इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती, हमास का हथियार खत्म करना और युद्ध से तबाह इलाके के रिकंस्ट्रक्शन की देखरेख करना शामिल है।

एग्जीक्यूटिव कमेटी में US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो, ट्रंप के मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट अजय बंगा, डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर रॉबर्ट गेब्रियल और इज़राइली अरबपति याकिर गेबे शामिल हैं। इसमें कतर, मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जो सीज़फ़ायर पर नज़र रख रहे हैं। हमास के साथ अपने संबंधों और ग्रुप को सत्ता छोड़ने और गाज़ा में हथियार डालने के लिए बढ़ावा देने में इसकी संभावित भूमिका को देखते हुए तुर्की की पार्टनरशिप महत्वपूर्ण हो सकती है।

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