प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत भारत दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बीते दस वर्षों में देश का दालों का निर्यात, आयात की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ा है, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल-दिसंबर की अवधि में भारत ने 4,437 करोड़ रुपये की दालों का निर्यात किया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा सिर्फ 1,218 करोड़ रुपये था। इस तरह, पिछले दस वर्षों में दालों के निर्यात में 264.29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, इसी अवधि में दालों के आयात में 86.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देश में वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल-दिसंबर तक 31,814 करोड़ रुपये की दालों का आयात किया गया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा 17,063 करोड़ रुपये था।
अगर पिछले यूपीए सरकार (2004-2014) के दस वर्षों की तुलना करें, तो उस दौरान दालों के निर्यात में 187.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, लेकिन आयात में 457.1 प्रतिशत का भारी इजाफा दर्ज किया गया था। वहीं, एनडीए सरकार (2014-2024) के दस वर्षों में निर्यात दर तेज हुई है, जबकि आयात दर पहले की तुलना में नियंत्रित रही है।
एनडीए सरकार ने दाल उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के रूप में 93,544 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जबकि यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ 1,936 करोड़ रुपये का MSP भुगतान किया था।
सरकार ने दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लागू की हैं। बजट 2025-26 में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि 2028-29 तक अरहर (तुअर), उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की जाएगी। इसके तहत 13.22 लाख मीट्रिक टन अरहर, 9.40 लाख मीट्रिक टन मसूर और 1.35 लाख मीट्रिक टन उड़द की खरीद की मंजूरी दी गई है।
यह भी पढ़ें:
यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग: एशिया ब्यूरो सदस्य चुने गए संजय सिंह!, 38 में से 22 वोट का मिला समर्थन!
राजीव चंद्रशेखर बने केरल भाजपा के नए अध्यक्ष, शशि थरूर ने दी बधाई
कर्नाटक: संविधान की ‘कॉन्ट्रैक्ट किलर’ बनने की कोशिश कर रही है कांग्रेस!
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसानों को अधिक समर्थन देने और दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए ठोस नीतियां लागू कर रही है। भारत में दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकारी योजनाओं, MSP समर्थन और निर्यात वृद्धि के चलते देश न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करने, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह भी देखें: